संयुक्त राष्ट्र, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के एक विशेष विशेषज्ञ की उस रिपोर्ट का कड़ा विरोध जताया है, जिसमें वांछित आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को 'भारत में रहने वाला' बताया गया। भारत ने कहा कि इस तरह की गलत जानकारी संयुक्त राष्ट्र की साख को गंभीर नुकसान पहुंचाती है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को आतंकवाद और मानवाधिकार मामलों के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की जुलाई में जारी रिपोर्ट की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में 'गंभीर और साफ दिखाई देने वाली गलतियां' हैं और इसे तैयार करने में 'अयोग्यता' दिखाई गई है। विशेष रिपोर्टर सीधे संयुक्त राष्ट्र से वेतन नहीं लेते और उनसे स्वतंत्र रूप से काम करने की अपेक्षा की जाती है।
'यूएन वॉच' नामक निगरानी संगठन के एक डेटाबेस के अनुसार, बेन सॉल को चीन से 1,50,000 डॉलर की फंडिंग मिली है।
'यूएन वॉच' के मुताबिक, सिडनी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर और ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल फ्यूचर फेलो रहे सॉल को कुल मिलाकर 1.7 मिलियन डॉलर का वित्तीय सहयोग मिला है। इस फंडिंग में उनके विश्वविद्यालय के अलावा अमेरिका के तीन विश्वविद्यालयों तथा स्विट्जरलैंड और स्पेन की संस्थाओं का भी योगदान बताया गया है।
बेन सॉल की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी संबंधों वाले 'भारत-आधारित' डी-कंपनी आपराधिक गिरोह का सरगना बताया गया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उसे अल-कायदा से संबंध रखने के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में डाला गया था।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए रघु पुरी ने कहा, "अगर इस लाइन को अकेले पढ़ा जाए तो यह वास्तविक स्थिति से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।"
उन्होंने कहा कि डी-कंपनी और उसका प्रमुख दाऊद इब्राहिम 1993 से भारत में हुए आतंकी हमलों के मामलों में वांछित हैं।
पुरी के मुताबिक, सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत जारी आधिकारिक विवरण में यह बात साफ तौर पर दर्ज है, लेकिन सॉल ने इसे अपनी रिपोर्ट में शामिल नहीं किया।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि दाऊद इब्राहिम भारत के बाहर रहता है और भारत उसे लंबे समय से आतंकवादी के रूप में तलाश रहा है। इस तथ्य का जिक्र न करना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे विशेष पदाधिकारियों की यह अयोग्यता संयुक्त राष्ट्र को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाती है।
भारत के आग्रह पर दाऊद इब्राहिम के खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। इसके तहत दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उसकी तलाश और गिरफ्तारी के लिए सतर्क रहने को कहा गया है।
पुरी ने कहा, "रिकॉर्ड के लिए मैं बताना चाहता हूं कि दाऊद इब्राहिम 2003 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने से काफी पहले भारत से भाग चुका था। भारत से बाहर रहते हुए ही उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंधों के कारण प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया था। दाऊद आज भी भारत में वांछित अपराधी है और संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार वह उसी देश में रह रहा है, जहां ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ पाया गया था।"
पुरी ने कहा, "मानवाधिकारों का ढांचा आतंकवादियों या कट्टरपंथ और उग्रवाद फैलाने वालों की शरणस्थली नहीं बन सकता। आतंकवाद को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता। भारत को विशेष रिपोर्टर के कार्यालय को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों पर चिंता है। हम उम्मीद करते हैं कि इस पद से जुड़े लोग ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता के सर्वोच्च मानकों का पालन करेंगे।"
कश्मीर का मुद्दा उठाने वाले पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए रघु पुरी ने कहा, "इस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति जानता है कि मेरे देश के खिलाफ कही गई बातें, जिनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का जिक्र भी शामिल है, बेहद संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए किया गया प्रचार है।"
उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ ये आरोप पाकिस्तान के 'वास्तविक शासकों', यानी उसकी सेना की ओर से लगाए गए हैं। मैं रिकॉर्ड पर दोहराना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं, हमेशा रहे हैं और हमेशा रहेंगे।
--आईएएनएस
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