नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत और फिनलैंड ने आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने तथा प्रस्तावित ईयू-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के जरिए वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की संभावनाओं पर सहमति जताई है।
डेली फिनलैंड की रिपोर्ट में कहा गया है कि फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री रिक्का पुर्रा तथा भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हेलसिंकी में मुलाकात की और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विविध और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की।
बैठक के बाद रिक्का पुर्रा ने कहा, "डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी तथा ईयू और भारत के बीच होने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हमें वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने में सक्षम बनाएगा।"
पुर्रा ने कहा कि डिजिटल और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस के क्षेत्र में फिनलैंड की विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी) के अनुरूप है।
उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि विश्वसनीय साझेदार के रूप में हम स्पेस, डिफेंस और अन्य महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में अपने सहयोग को और गहरा करेंगे।"
वहीं, पीयूष गोयल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "हमने आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने, व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ाने तथा डिजिटलाइजेशन और उभरते क्षेत्रों में साझेदारी का विस्तार करने पर चर्चा की।"
फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री साकारी पुइस्तो ने भी पीयूष गोयल से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भारतीय मंत्री की फिनलैंड यात्रा यह दर्शाती है कि भारत की विकास योजनाओं और ईयू-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के क्रियान्वयन से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को लेकर दोनों देशों की गहरी रुचि है।
उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार का विशाल आकार फिनलैंड की कंपनियों के लिए पारंपरिक और नए दोनों क्षेत्रों में अपार संभावनाएं उपलब्ध कराता है, साथ ही भारतीय कंपनियों के साथ सहयोग के नए अवसर भी पैदा करता है।
पीयूष गोयल ने बताया कि उनकी साकारी पुइस्तो के साथ हुई बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), 6जी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, स्पेस और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
इसके अलावा, पीयूष गोयल ने शुक्रवार को हेलसिंकी में फिनलैंड की प्रमुख टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकें भी कीं। इस दौरान उन्होंने कंपनियों से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) क्षमताओं का विस्तार करने और भारत से निर्यात बढ़ाने के लिए निवेश बढ़ाने का आग्रह किया।
--आईएएनएस
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