भारत का लक्ष्य 1,000 क्यूबिट्स और 2,000 किमी का क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करना: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत का लक्ष्य 1,000 क्यूबिट्स और 2,000 किमी का क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करना: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास नेशनल क्वांटम मिशन है, जिसका लक्ष्य 1,000 क्यूबिट्स वाला क्वांटम कंप्यूटर और 2,000 किलोमीटर का क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करना है, जिससे रक्षा, साइबर सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आएगा।

इस मिशन के लिए लगभग 6,000 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। यह मिशन देश के 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 43 संस्थानों में लागू किया जा रहा है। इसे चार मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है-क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी, और क्वांटम मैटेरियल्स व डिवाइसेज।

आंध्र प्रदेश में 'अमरावती क्वांटम वैली' के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस मिशन के तहत अगले 8 वर्षों में 1,000 फिजिकल क्यूबिट्स वाला क्वांटम कंप्यूटर विकसित करने, सुरक्षित क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करने, लंबी दूरी के क्वांटम संचार को सक्षम बनाने और 2,000 किमी तक शहरों के बीच सुरक्षित क्वांटम के डिस्ट्रीब्यूशन का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्री ने कहा कि क्वांटम तकनीक अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। अगर भारत आने वाले वर्षों में अपनी संचार व्यवस्था, रक्षा प्रणाली, स्वास्थ्य नवाचार और वैश्विक तकनीकी पहचान को सुरक्षित रखना चाहता है तो उसे इस क्षेत्र में आगे रहना ही होगा।

शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, राज्य मंत्री नारा लोकेश, सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में पिछले एक साल में जो तेज विकास हुआ है, वह केंद्र और राज्य के सहयोग का अच्छा उदाहरण है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'डबल इंजन मॉडल' बताया जाता है, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं।

उन्होंने विशाखापट्टनम में बने नेशनल सेंटर फॉर ओशन साइंसेज का उदाहरण देते हुए बताया कि यह परियोजना 2006 में शुरू हुई थी, लेकिन करीब 20 साल तक अटकी रही। मौजूदा राज्य सरकार के आने के बाद इसे कुछ ही महीनों में पूरा कर लिया गया था।

--आईएएनएस

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