नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने शनिवार को कहा कि ई20 फ्यूल को साइंटिफिक टेस्टिंग और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के आधार पर पेश किया गया है और इससे गाड़ी के पार्ट्स को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है; उन्होंने इक्का-दुक्का शिकायतों की वजह फ्यूल में खराबी या मिलावट को बताया, साथ ही यह भी कहा कि गाड़ी के मॉडल के हिसाब से माइलेज में 3-5 प्रतिशत की कमी आ सकती है, लेकिन ई10 गाड़ियों की वारंटी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (कॉरपोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि पिछले कुछ दिनों में एथेनॉल के उपयोग को लेकर कई तरह की शंकाएं और सवाल सामने आए हैं।
उन्होंने कहा, "भारत में 2023 से ई20 ईंधन के अनुरूप वाहन तैयार करना अनिवार्य किया गया है। इससे पहले ई10 (10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू था। इसलिए 2023 के बाद से बाजार में आने वाले वाहन और उपलब्ध ईंधन दोनों ई20 मानकों के अनुसार हैं।"
इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वर्तिका शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2013-14 में भारत में पेट्रोल में केवल 1.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था।
उन्होंने कहा, "सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी ई20 लागू करना था, जिसे दिसंबर 2025 में तय समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया।"
शुक्ला ने बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया। इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक प्रमाणों, व्यापक परीक्षणों और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) तथा वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए विस्तृत परीक्षणों पर आधारित है। साथ ही यह कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए अपनाई जा रही वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप भी है।
वहीं, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट अफेयर्स एंड गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग उन चुनिंदा क्षेत्रों में से है, जहां गुणवत्ता और प्रदर्शन को लेकर बेहद कड़े नियम लागू होते हैं।
उन्होंने कहा, "वाहनों के लिए उत्सर्जन, सुरक्षा और प्रदर्शन के सख्त मानक तय हैं। इसी तरह ईंधन के लिए भी स्पष्ट गुणवत्ता मानक निर्धारित किए गए हैं।"
गुलाटी ने बताया कि वाहन निर्माता किसी भी नए मॉडल को बाजार में उतारने से पहले उसका विस्तृत परीक्षण करते हैं। इसके अलावा वाहन को सर्टिफिकेशन और होमोलोगेशन (सरकारी मानकों के अनुरूप प्रमाणन) की प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होता है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए तेजी से डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में काम करना आवश्यक है। उनके अनुसार एथेनॉल एक कम-कार्बन (लो-कार्बन) ईंधन है, क्योंकि इसका उत्पादन पौधों से होता है और यह पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल है।
--आईएएनएस
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