पारामारिबो, 8 मई (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सूरीनाम देश के दौरे पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को पारामारिबो में 'प्रगति के लिए साझेदारी' विषय पर बात की। इसके साथ ही, विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत एक पौधा भी लगाया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सूरीनाम के 'इंडिया हाउस' में 'एक पेड़ मां के नाम' पहल के तहत पौधा लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "'एक पेड़ मां के नाम' के तहत सूरीनाम स्थित इंडिया हाउस में एक पौधा लगाकर मुझे बहुत खुशी हुई।"
इससे पहले, एस. जयशंकर ने 'प्रगति के लिए साझेदारी' विषय पर चर्चा की। उन्होंने इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए सूरीनाम के विदेश मंत्रालय और अपने समकक्ष मेल्विन बाउवा को धन्यवाद दिया।
जयशंकर ने 'एक्स' पर सम्मेलन की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "आज शाम पारामारिबो में 'प्रगति के लिए साझेदारी' विषय पर संबोधित किया। अपनी उपस्थिति के लिए विदेश मंत्री मेल्विन बाउवा का और इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए सूरीनाम के विदेश मंत्रालय का धन्यवाद।"
उन्होंने आगे लिखा, "मैंने यह बात रखी कि एक मुश्किल दुनिया में भी प्रगति की जरूरत होती है और यह साझेदारी के जरिए सबसे अच्छे तरीके से हासिल की जा सकती है। मैंने एक भरोसेमंद साझेदार की खूबियों पर जोर दिया, जो राष्ट्रीय हितों और वैश्विक भलाई के बीच तालमेल बिठा सके। इस संदर्भ में मैंने वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका का जिक्र किया, जिसमें हमारी विकास साझेदारियों, वैश्विक कार्यबल, 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (सबसे पहले मदद पहुंचाने वाले) के तौर पर हमारे रिकॉर्ड और नई पहलों पर खास ध्यान दिया गया।"
एस. जयशंकर ने आगे कहा, "यही वह भारत है जो सूरीनाम की विकास यात्रा में उसका साझेदार बनेगा और मिलकर भारत-सूरीनाम कहानी का अगला अध्याय लिखेगा।"
इससे पहले, गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सूरीनाम के पारामारिबो शहर में एक फल-प्रसंस्करण केंद्र सूरीनाम को सौंपा। इस केंद्र की स्थापना भारत की आर्थिक मदद से की गई थी। भारत ने सूरीनाम को फल-प्रसंस्करण मशीनें दीं। इन मशीनों के लिए फंड उस 10 लाख अमेरिकी डॉलर के 'लघु और मध्यम उद्यम' अनुदान से दिया गया था, जिसकी घोषणा विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2025 में की थी।
इस कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान एस. जयशंकर ने कहा कि यह परियोजना सूरीनाम और ग्लोबल साउथ के साझेदार के रूप में भारत के व्यापक संदेश को भी रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि 'वसुधैव कुटुंबकम' के प्रति भारत की प्रतिबद्धता सिर्फ शब्दों में ही नहीं, बल्कि खास परियोजनाओं और ठोस गतिविधियों के जरिए भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना इसी बात का एक बहुत अच्छा उदाहरण है।
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