नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) चालू वित्त वर्ष में 2.57 लाख करोड़ रुपए के पुष्टि किए गए टैक्स बकाये की वसूली के लिए प्रयास तेज करने जा रहा है।
इस अभियान के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में देश भर के 10,000 सबसे बड़े टैक्स बकाया मामलों की निगरानी के लिए विशेष टीमें बनाई जाएंगी। टैक्स विभाग के अधिकारियों ने एनडीटीवी प्रॉफिट को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, टैक्स वसूली और अनुपालन निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
सीबीडीटी अधिकारियों ने बताया कि टैक्स वसूली टीमें डिफॉल्टरों से जुड़ी संपत्तियों और गिरवी रखी गई परिसंपत्तियों का पता लगाने के लिए सीईआरएसएआई के मॉर्गेज और एसेट डेटाबेस का भी उपयोग कर सकती हैं।
टैक्स विभाग बड़े एडवांस टैक्स देने वालों पर भी नजर रखेगा और टैक्स छूट तथा कटौतियों के गलत इस्तेमाल की पहचान करेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में सीबीडीटी ने 2.24 लाख अपीलों का निपटारा किया, जिनमें 8.27 लाख करोड़ रुपए की विवादित टैक्स मांग शामिल थी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, लंबित अपीलों की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में 5.40 लाख से घटकर 4.95 लाख रह गई। साथ ही अधिकारियों को गैर-अनुपालन करने वाले टैक्सदाताओं से वसूली पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
बजट 2026 के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य 26.97 लाख करोड़ रुपए रखा गया है।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर मामूली बढ़ा, लेकिन सरकार के संशोधित अनुमान से कम रहा। इसकी वजह बदलते आर्थिक हालात बताए गए हैं।
अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष कर संग्रह में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 23.4 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। हालांकि यह संशोधित अनुमान 24.21 लाख करोड़ रुपए से करीब 81,000 करोड़ रुपए कम रहा, जिससे यह संकेत मिला कि टैक्स राजस्व में अपेक्षा से कम बढ़ोतरी हुई।
वहीं, हाल ही में लागू किए गए आयकर अधिनियम 2025 को लेकर मुख्य आयकर आयुक्त (आईटी एवं टीपी) निरुपमा कोतरू ने कहा कि इससे भारत का टैक्स सिस्टम ज्यादा सरल, समझने में आसान और करदाताओं के अनुकूल बना है।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य आम लोगों को बिना किसी भ्रम के टैक्स रिटर्न भरने में मदद करना और सामान्य टैक्स प्रक्रिया के लिए पेशेवरों पर निर्भरता कम करना है।
--आईएएनएस
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