बाल शोषण के आरोपों के बाद कैपजेमिनी ने बेंगलुरु स्थित डेकेयर सेंटर को अस्थायी रूप से किया बंद

बाल शोषण के आरोपों के बाद कैपजेमिनी ने बेंगलुरु स्थित डेकेयर सेंटर को अस्थायी रूप से किया बंद

नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। आईटी कंपनी कैपजेमिनी ने बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप सामने आने के बाद बेंगलुरु में अपने कैंपस में मौजूद डेकेयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह जानकारी कंपनी की ओर से एक बयान में दी गई।

कंपनी ने कहा, "कैपजेमिनी की सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों की सेहत, सुरक्षा और भलाई है।"

कंपनी ने आगे कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और मामले की सच्चाई जानने के लिए उनकी सहायता कर रही है।

बयान में कहा गया, "एहतियात के तौर पर, हम बेंगलुरु स्थित कैंपस डेकेयर सुविधा को अस्थायी रूप से बंद कर रहे हैं।"

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत पांच महिला केयरगिवर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

यह डेकेयर सुविधा बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड में कैपजेमिनी के एचएएल कैंपस में स्थित है।

पुलिस ने बताया कि ये कथित घटनाएं तब सामने आईं जब व्हाट्सएप पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें चाइल्डकेयर सेंटर के अंदर दुर्व्यवहार होता दिख रहा था।

डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट के एक अधिकारी की शिकायत पर 29 जून को एचएएल पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, इस मामले में पांच केयरगिवर्स (देखभाल करने वालों) के नाम शामिल हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि देखभाल करने वाले छोटे बच्चों के रोने पर उनके साथ मारपीट करते थे और उन्हें डराते-धमकाते थे।

माना जा रहा है कि जिन बच्चों के साथ ऐसा हुआ, उनकी उम्र दो से तीन साल के बीच है।

एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ बच्चों के मुंह में टॉयलेट जेट स्प्रे से पानी की बौछार की गई, उन्हें बाथरूम में बंद कर दिया गया, वेस्टर्न-स्टाइल टॉयलेट पर बैठाया गया और फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के अंदर डाल दिया गया।

इस बीच, पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है।

इससे पहले जनवरी में कैपजेमिनी ने फ्रांस में 2,400 तक नौकरियां कटौती की घोषणा की थी। यह संख्या देश में कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 6 प्रतिशत है। आईटी सर्विस कंपनी को अपने घरेलू बाजार के मुख्य सेक्टरों में कम मांग का सामना करना पड़ रहा है।

--आईएएनएस

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