नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (एनएच-19) और वाराणसी रिंग रोड को गंगा नदी के किनारे जोड़ने वाले लिंक कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 14,447.64 करोड़ रुपए है, जिसमें 6,037.85 करोड़ रुपए सिविल निर्माण कार्य और 541.11 करोड़ रुपए भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत किया जाएगा।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, करीब 46.039 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 6-लेन एलिवेटेड मुख्य मार्ग, गंगा पर आइकॉनिक केबल-स्टे ब्रिज, एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-सह-प्रमुख पुल, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह परियोजना एनएच-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच निर्बाध संपर्क उपलब्ध कराएगी, जिससे शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा और शहरी यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।
इस कॉरिडोर को 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसके शुरू होने के बाद परियोजना क्षेत्र में औसत यात्रा समय लगभग 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा, यानी करीब 67 प्रतिशत की कमी आएगी। वहीं, एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में लगने वाला समय भी 50 मिनट से घटकर लगभग 25 मिनट रह जाएगा।
यह परियोजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप तैयार की गई है। इसके जरिए प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और रामनगर आईडब्ल्यूएआई (आईडब्ल्यूएआई) पोर्ट तक बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। साथ ही काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), नमो घाट, रामनगर किला और वाराणसी के घाटों तक पहुंच भी पहले से अधिक आसान हो जाएगी।
कैबिनेट के अनुसार, यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करेगी। इससे माल परिवहन अधिक कुशल होगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को प्रोत्साहन मिलेगा तथा क्षेत्र के सतत आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
सरकार ने बताया कि यह कॉरिडोर वाराणसी और चंदौली के सड़क नेटवर्क को जाम से मुक्त करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह एनएच-19, वाराणसी रिंग रोड (एनएच-135B), रामनगर, बीएचयू और शहर के अन्य प्रमुख क्षेत्रों को हाई-स्पीड, नियंत्रित प्रवेश (एक्सेस कंट्रोल्ड) मार्ग से जोड़ेगा।
परियोजना के तहत बीएचयू/लंका से सामने घाट तक एक एलिवेटेड स्पर (शाखा मार्ग) भी बनाया जाएगा, जिससे अत्यधिक व्यस्त लंका चौराहे पर ट्रैफिक जाम में बड़ी राहत मिलेगी। यह स्थानीय और लंबी दूरी के वाहनों के आवागमन को अलग-अलग करेगा।
हर वर्ष 15 करोड़ से अधिक पर्यटक और श्रद्धालु वाराणसी आते हैं। ऐसे में यह परियोजना धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच को आसान बनाएगी और शहर के मौजूदा सड़क नेटवर्क पर दबाव कम करेगी।
सरकार के मुताबिक, यह कॉरिडोर नियंत्रित यातायात व्यवस्था के जरिए सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाएगा, वाहनों की परिचालन लागत और प्रदूषण कम करेगा तथा यात्रियों और माल परिवहन दोनों के लिए यात्रा को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगा। साथ ही एनएच-19, बीएचयू-रामनगर कॉरिडोर और एनएच-35 पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।
इस परियोजना में कई आधुनिक इंजीनियरिंग विशेषताएं शामिल की गई हैं, जिनमें गंगा नदी पर 910 मीटर लंबा केबल-स्टे ब्रिज, 1.32 किलोमीटर लंबा एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-सह-प्रमुख पुल, जिसमें ट्रैवलेटर की सुविधा होगी ताकि श्रद्धालु आसानी से काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंच सकें। इसके अलावा मौजूदा और प्रस्तावित मालवीय ब्रिज के ऊपर रेल ओवर ब्रिज (आरओबी), आपातकालीन पार्किंग बे, शोर अवरोधक (नॉइज बैरियर), आकर्षक फसाड लाइटिंग और वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित वास्तुशिल्प डिजाइन भी शामिल होंगे। ये सभी सुविधाएं न केवल परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाएंगी, बल्कि वाराणसी के शहरी स्वरूप को भी नया आयाम देंगी।
यह परियोजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत चंदौली एसईजेड जैसे एक आर्थिक केंद्र, चंदौली आकांक्षी जिला जैसे एक सामाजिक केंद्र और लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, काशी रेलवे स्टेशन, बनारस रेलवे स्टेशन, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और रामनगर आईडब्ल्यूएआई पोर्ट सहित छह प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों को आपस में जोड़ेगी।
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी में आधुनिक, उच्च क्षमता वाला शहरी परिवहन नेटवर्क तैयार करेगा, जिससे लोगों को तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा सुविधा मिलेगी, शहर में ट्रैफिक जाम कम होगा, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा तथा पीएम गति शक्ति और विकसित भारत के विजन को साकार करने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
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