एआरसी कंपनियां भारत की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बना रही हैं: डीएफएस सचिव

एआरसी कंपनियां भारत की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बना रही हैं: डीएफएस सचिव

नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। भारत की वित्तीय व्यवस्था एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) की बढ़ती भूमिका के कारण पहले से अधिक मजबूत और स्थिर हुई है। यह बात वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू ने सोमवार को कही।

राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एएसआरईसी के लोगो लॉन्च कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत को संबोधित करते हुए नागराजू ने कहा कि एआरसी देश की वित्तीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरी है। ये कंपनियां बैंकों और वित्तीय संस्थानों की फंसी हुई परिसंपत्तियों के समाधान में अहम भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने कहा, "एआरसी बैंकों से गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) खरीदने और बैंकिंग व्यवस्था में भरोसा बहाल करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।"

उन्होंने आगे कहा कि ये संस्थाएं बैंकों की बैलेंस शीट को साफ करने, तरलता बढ़ाने और नए ऋण वितरण पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती हैं, जिससे आर्थिक विकास को समर्थन मिलता है।

नागराजू ने कहा कि भारत के वित्तीय क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया है। पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं।

उन्होंने कहा, "सरकार और नियामक संस्थाओं ने हमेशा राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए तनावग्रस्त परिसंपत्तियों की समस्या को हल करने और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कदम उठाए हैं।"

उन्होंने हाल के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थागत सहयोग, बेहतर ढांचे और मजबूत नेटवर्क के कारण यह क्षेत्र भविष्य की वृद्धि के लिए अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच गया है।

उन्होंने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया जैसे साझेदार संस्थानों सहित सभी हितधारकों और नेतृत्व टीमों का सहयोग के लिए आभार भी जताया।

डीएफएस सचिव ने कहा कि एआरसी कर्ज समाधान के लिए कई तरीके अपनाती हैं, जिनमें ऋण पुनर्गठन, सुरक्षा हितों को लागू करना और कर्ज को इक्विटी में बदलना शामिल है।

उन्होंने कहा कि एआरसी, दिवालियापन और दिवालिया संहिता (आईबीसी) के पूरक के रूप में काम करती हैं और तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान के लिए एक वैकल्पिक और अक्सर तेज मार्ग उपलब्ध कराती हैं।

हालांकि, नागराजू ने यह भी माना कि एआरसी क्षेत्र को अभी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें सीमित पूंजी उपलब्धता, नियामकीय जटिलताएं, लंबे कानूनी विवाद और बैंकों तथा एआरसी के बीच परिसंपत्तियों के मूल्यांकन में अंतर शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण वसूली प्रक्रिया में देरी होती है और लेनदेन के अवसर कम हो जाते हैं।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एआरसी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा, "आरबीआई ने एआरसी में ऑटोमैटिक रूट के जरिए 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दी है। साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को एआरसी द्वारा जारी सिक्योरिटी रिसीट्स में निवेश की भी मंजूरी दी गई है।"

--आईएएनएस

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