2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों को मिली नई रफ्तार, सरकार की पीएम ई-ड्राइव और पीएलआई जैसी योजनाओं से बढ़ा ईवी मार्केट

2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों को मिली नई रफ्तार, सरकार की पीएम ई-ड्राइव और पीएलआई जैसी योजनाओं से बढ़ा ईवी मार्केट

नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। साल 2025 में भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की दिशा में बड़ा काम किया। ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए चलाई जा रही प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत रिकॉर्ड निवेश और पीएम ई-ड्राइव पहल की सफलता से भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति को नई गति मिली है।

मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वर्ष 2024-25 के दौरान पीएलआई-ऑटो योजना के तहत करीब 1,999.94 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि कंपनियों को दी गई। 31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 13.61 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई, जिनमें 10.42 लाख से ज्यादा दोपहिया वाहन, 2.38 लाख से अधिक तिपहिया वाहन, 79,540 इलेक्ट्रिक कारें और 1,391 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना को 29 सितंबर 2024 को शुरू किया गया था, जिसके लिए सरकार ने 10,900 करोड़ रुपए का बजट तय किया था। इस योजना का मकसद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा देना, चार्जिंग स्टेशन बनाना और इलेक्ट्रिक वाहन बनाने का मजबूत ढांचा तैयार करना है।

इस योजना के तहत 3,679 करोड़ रुपए की राशि सब्सिडी के लिए रखी गई है, ताकि 28 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदे जा सकें। इसमें 24.79 लाख दोपहिया, 3.28 लाख तिपहिया और 5,643 इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल हैं।

इसके अलावा 4,391 करोड़ रुपए की राशि से 14,028 इलेक्ट्रिक बसें सार्वजनिक परिवहन के लिए खरीदी जाएंगी, ताकि शहरों में प्रदूषण कम हो सके।

31 दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत 1,703.32 करोड़ रुपए की राशि जारी की जा चुकी है और 21.36 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बेचे जा चुके हैं।

सरकारी कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) ने 10,900 इलेक्ट्रिक बसों की निविदा पूरी की है। ये बसें दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे पांच बड़े शहरों में पहले चरण में चलाई जाएंगी।

सरकार इलेक्ट्रिक कार निर्माण को बढ़ावा देने की योजना भी लागू कर रही है, जिसे 15 मार्च 2024 को अधिसूचित किया गया था, जिसका उद्देश्य विदेशी निवेश लाना, भारत को इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण केंद्र बनाना और देश में अधिक रोजगार पैदा करना है।

इस योजना में शामिल कंपनियों को 3 साल में कम से कम 4,150 करोड़ रुपए (500 मिलियन डॉलर) का निवेश करना होगा। यह पहल 'मेक इन इंडिया' अभियान से जुड़ी है, जिससे वाहन देश में ही बनेंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा।

--आईएएनएस

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