गांधीनगर, 6 जनवरी (आईएएनएस)। एक समय था, जब यह गांधीनगर के कोलवडा का यह तालाब बेहद खराब स्थिति में था। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में अमृत 2.0 योजना के तहत गांधीनगर महानगरपालिका की ओर से रीडेवलप किए जा रहे तालाबों के तहत इस कोलवडा सरोवर का पुनर्विकास किया गया है। इसके अंतर्गत यहां 8.47 करोड़ रुपये की लागत से 1.10 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में 55 हजार वर्ग मीटर के वॉटर बॉडी के साथ इस प्रोजेक्ट को तैयार किया गया है।
इस तालाब की क्षमता 182.5 मिलियन लीटर है, वहीं इसके आसपास 41,301 वर्ग मीटर क्षेत्र को ग्रीन एरिया के रूप में विकसित कर बादाम, वट, पीपल, आम, आंवला, सरू, जामुन, जामफल जैसी देशी प्रजातियों के 30 हजार पेड़ लगाए गए हैं। यहां ट्रैक, खेलकूद व व्यायाम के लिए विशेष सुविधाएं भी विकसित की गई हैं, साथ ही बायोडायवर्सिटी सिटी भी स्थापित की गई है। कोलवडा का अमृत सरोवर आज प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट बन गया है।
गांधीनगर में कुल 123 तालाब हैं, जिनमें से 29 तालाबों में जल संग्रहण बढ़ाने का कार्य महानगरपालिक द्वारा किया गया है। कोलवडा के इस अमृत सरोवर में 3 एमएलडी क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित किया गया है। पहले यहां डंपिंग साइट जैसी स्थिति थी, वहीं आज यहां न केवल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ पक्षियों का कोलाहल सुनाई देता है, बल्कि कोलवडा, रांधेजा और गांधीनगर शहर की 10,000 से ज्यादा आबादी को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
महानगरपालिका आयुक्त जेएन वाघेला ने कहा कि यह तालाब पहले बहुत खराब और उपेक्षित हालत में थी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गांधीनगर नगर निगम ने अमृत 2.0 योजना के तहत इस कोलवडा तालाब को फिर से बनाया है, जो सरकार की ओर से लागू की जा रही झील विकास परियोजनाओं का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत झील को 1.10 लाख वर्ग मीटर के एरिया में 8.47 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया गया है, जिसमें 55 हजार वर्ग मीटर में पानी फैला हुआ है।
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