पीलीभीत, 10 मार्च (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की पीलीभीत में किसानों का रुझान पॉलीहाउस खेती के प्रति बढ़ रहा है। इस खेती से किसानों को काफी मुनाफा भी हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर हाथ को रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने के विजन को जमीनी स्तर पर साकार करने की एक मिसाल उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में देखने को मिल रही है।
यहां सहारनपुर के महावीर सिंह किसानों को पारंपरिक खेती से हटाकर आधुनिक तकनीक आधारित पॉलीहाउस खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत इस पहल से किसानों की आय में बड़ा इजाफा हो रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
पॉलीहाउस ट्रेनर महावीर सिंह ने आईएएनएस से बातचीत की। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान वे पीलीभीत आए। यहां के किसानों को पॉलीहाउस खेती की नई तकनीक सिखानी शुरू की, जिसके बाद किसान ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और लाल और पीली शिमला मिर्च जैसी उन्नत और अधिक मुनाफे वाली फसलों का उत्पादन कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अभी अधिकतर किसानों को इस मैनेजमेंट के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन देखने में मिल रहा है कि जिन्हें इस मैनेजमेंट के बारे में जानकारी है, वह लाभ उठा रहे हैं। इस खेती में अगर किसान 5 से 6 लाख रुपए लगाता है तो वह सालाना 25 लाख रुपए की कमाई कर सकता है। ट्रेडिशनल फार्मिंग में बहुत कम इनकम मिलती है। ज्यादा मुनाफा के लिए पॉलीहाउस खेती को अपनाना चाहिए।
किसान नामचंद्र वर्मा ने कहा कि आधुनिक खेती की इस तकनीक से किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। कई किसान अब पॉलीहाउस के जरिए उन्नत और उच्च मूल्य वाली सब्जियों की खेती कर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
जिला उद्यान अधिकारी रामेश्वर दयाल ने कहा कि उद्यान विभाग के अनुसार केंद्र सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत पॉलीहाउस लगाने के लिए किसानों को सहायता दी जाती है। इस योजना में करीब 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।
पॉलीहाउस में ऑफ-सीजन सब्जियां जैसे शिमला मिर्च, टमाटर और अन्य सब्जियां उगाई जाती हैं, जो खुले खेतों में उस समय उपलब्ध नहीं होतीं। ऑफ-सीजन होने के कारण इन फसलों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी होती है।
पीलीभीत में पॉलीहाउस के जरिए हो रही आधुनिक खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ रही है बल्कि गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिल रही है।
उन्होंने एक किसान आयुष अग्रवाल का जिक्र करते हुए कहा कि गत वर्ष उन्होंने 29 लाख की शिमला मिर्च बेची थी। विभाग की ओर से किसानों को पौध और बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं और अनुदान पर निशुल्क बीज दिए जाते हैं।
--आईएएनएस
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