गुजरात: पॉक्सो मामलों में पांच साल में 1,785 फैसले, 908 दोषियों को उम्रकैद और 16 को फांसी की सजा

गुजरात: पॉक्सो मामलों में पांच साल में 1,785 फैसले, 908 दोषियों को उम्रकैद और 16 को फांसी की सजा

गांधीनगर, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। गुजरात में बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए पोक्सो मामलों में त्वरित जांच, चार्जशीट और सुनवाई पर जोर दिया जा रहा है। 2022 से अगस्त 2026 के दौरान पॉक्सो अदालतों ने कुल 1,785 मामलों में फैसले सुनाए। आंकड़ों के अनुसार, इन मामलों में 908 दोषियों को आजीवन कारावास और 16 को फांसी की सजा सुनाई गई। इन मामलों की जांच से लेकर अभियोजन और सुनवाई तक की प्रक्रिया को गति देने के लिए सरकारी वकीलों की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है।

सरकार बाल यौन अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करने की बात कह रही है। इसी दिशा में गंभीर मामलों में विशेष सरकारी अभियोजकों की नियुक्ति और समय पर चार्जशीट दाखिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी न हो।

गांधीनगर के लॉ एंड ऑर्डर डीआईजी मकरंद चौहान ने बताया कि पॉक्सो मामलों में प्रभावी अभियोजन सजा दिलाने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी शहर या जिले की पुलिस इकाई को लगता है कि पॉक्सो की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कोई मामला बेहद गंभीर है, तो विशेष सरकारी अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति के लिए राज्य पुलिस मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाता है।

उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में विशेष अभियोजक की नियुक्ति से अभियोजन पक्ष को अदालत में अपना मामला प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद मिलती है। सरकार की ओर से जिलों में सरकारी वकीलों की नियुक्ति बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

आंकड़ों के अनुसार गुजरात में पॉक्सो मामलों में फैसलों और सजाओं की रफ्तार में लगातार तेजी देखी गई है। वर्ष 2022 में कुल 194 मामलों में फैसले सुनाए गए थे, जिनमें 107 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिली थी, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 499 फैसलों तक पहुंच गया, जिनमें 340 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

वहीं, 2026 में अगस्त तक ही 346 मामलों में फैसला हो चुका है और 241 आरोपियों को आजीवन कारावास दिया जा चुका है। केवल अगस्त 2026 की बात करें तो इसी एक महीने में पॉक्सो के 48 मामलों में सजा सुनाई गई, जिनमें से 35 आरोपियों को उम्रकैद मिली।

सूरत जिला एवं सत्र न्यायालय के सरकारी वकील नयन सुखड़वाला ने कहा कि पॉक्सो मामलों में समय पर चार्जशीट दाखिल करना बेहद महत्वपूर्ण है। यदि निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं होती तो आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि चार्जशीट समय पर दाखिल होने के साथ ही मामले का ट्रायल भी जल्द शुरू होना चाहिए। समय बीतने के साथ गवाहों की याददाश्त और उनके बयानों में अंतर आ सकता है, जिससे मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए जांच और सुनवाई दोनों में तेजी जरूरी है।

पिछले पांच वर्षों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गुजरात में पॉक्सो अपराधों से जुड़े मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की गति पर विशेष ध्यान दिया गया है। आंकड़े बताते हैं कि 1 से 15 दिनों के भीतर 140 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि 16 से 30 दिनों में जांच पूरी कर 1,339 मामलों में चार्जशीट पेश की गई।

वहीं सबसे अधिक 5,463 मामलों में 31 से 45 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई। इन आंकड़ों के आधार पर राज्य में जांच की समयसीमा और मामलों की निगरानी को अहम माना जा रहा है और पुलिस की जांच, अभियोजन पक्ष की तैयारी तथा अदालत में त्वरित सुनवाई के बीच बेहतर समन्वय के जरिए मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

--आईएएनएस

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