गुजरात के जल प्रबंधन मॉडल से ग्लोबल साउथ को सीख लेने की सलाह, पीएमओ ने साझा किया लेख

गुजरात के जल प्रबंधन मॉडल से ग्लोबल साउथ को सीख लेने की सलाह, पीएमओ ने साझा किया लेख

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लेख साझा करते हुए कहा कि भारत का जल-प्रबंधन मॉडल ग्लोबल साउथ के देशों के लिए उपयोगी सीख पेश कर सकता है। लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि जल सुरक्षा केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए बेहतर योजना, मजबूत स्थानीय संस्थाओं और जल प्रबंधन में समुदायों की भागीदारी भी जरूरी है।

पीएमओ ने एक्स पर लिखा, “भारत से, जल-शासन का एक मॉडल व्यापक ग्लोबल साउथ के लिए उपयोगी सीख दे रहा है। जल सुरक्षा केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण के बारे में नहीं है, बल्कि अच्छी योजना, मजबूत स्थानीय प्रणालियों और जल प्रबंधन में समुदायों को शामिल करने के बारे में भी है।”

लेख में कहा गया है कि गुजरात में जल सुधारों से लेकर बड़े पैमाने पर लागू किए गए राष्ट्रीय कार्यक्रमों तक भारत की यात्रा उन देशों के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जो जल प्रबंधन को बेहतर बनाने और बढ़ती जल जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

हाल ही में नई दिल्ली में ‘इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक’ के नौवें संस्करण का आयोजन किया गया। इसका मुख्य विषय जलवायु-लचीला जल प्रबंधन था। लेख के मुताबिक, चर्चा में पिछले एक दशक के दौरान भारत द्वारा जल क्षेत्र में हासिल की गई उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। इनमें जल आपूर्ति को टिकाऊ बनाए रखना, पानी के अधिक कुशल इस्तेमाल को बढ़ावा देना और इस्तेमाल किए जा चुके पानी को पर्यावरणीय तथा आर्थिक संसाधन के रूप में देखना शामिल है।

लेख में कहा गया है कि वैश्विक जल क्षेत्र में भारत का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। जलवायु संबंधी लगातार बढ़ते खतरों और पानी तक पहुंच की चुनौतियों से जूझने वाले देश से भारत अब बाढ़ और सूखे जैसी जलवायु चरम स्थितियों के लिए खुद को तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारत का अनुभव ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

लेख के अनुसार, पिछले करीब एक दशक में भारत ने जल प्रशासन को बेहतर बनाने, नदियों के पुनर्जीवन, जल और स्वच्छता की पहुंच बढ़ाने तथा समुदाय आधारित जल संरक्षण और जल संसाधनों के संवर्धन के लिए कई बड़े कार्यक्रम लागू किए हैं।

इस संदर्भ में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के 2001 से 2014 के कार्यकाल के दौरान शुरू की गई पहलों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। लेख के मुताबिक, गुजरात में हुए जल-प्रबंधन सुधारों ने एक तरह से उस प्रयोगशाला की भूमिका निभाई, जिसके अनुभवों को 2014 के बाद देशभर में लागू किए गए कई कार्यक्रमों में आगे बढ़ाया गया।

इनमें स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान, नमामि गंगे, अटल भूजल योजना और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

--आईएएनएस

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