गांधीनगर, 25 जून (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार राज्य को अधिक हरित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। 'ग्रीन गुजरात' के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास से जुड़ी कई योजनाएं चला रही है। इसी कड़ी में नर्सरी विकास योजना को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत सामाजिक वानिकी विभाग की पौधशालाओं में उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।
राज्य सरकार ने नर्सरी विकास कार्यक्रम के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इस राशि का उपयोग राज्यभर की सामाजिक वानिकी विभाग की नर्सरियों में बेहतर गुणवत्ता के पौधे तैयार करने के लिए किया जा रहा है। योजना के तहत स्थानीय प्रजातियों के पौधों को आधुनिक टाल सीडलिंग पद्धति से विकसित किया जा रहा है, जिसमें 6 से 8 फीट ऊंचाई तक के पौधे तैयार किए जाते हैं।
कृषि और बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों का कहना है कि सरकारी नर्सरियों से मिलने वाले पौधे न केवल किफायती होते हैं, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होती है। इन पौधों के अच्छे विकास के कारण हरियाली बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
किसान राजूभाई पटेल ने बताया कि निजी नर्सरियों की तुलना में सरकारी नर्सरी से पौधे काफी कम लागत में उपलब्ध हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां पौधे खरीदने के बाद यदि किसी प्रकार की तकनीकी सलाह या मार्गदर्शन की जरूरत होती है तो वह भी आसानी से मिल जाता है, जिससे किसानों को काफी लाभ होता है।
किसान तुलसीदास पटेल ने बताया कि वह फालसा के पौधे लेने राजभवन नर्सरी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि चार वर्ष पहले भी उन्होंने इसी नर्सरी से फालसा के पौधे खरीदे थे, जो अब फल देने लगे हैं और उनसे अच्छी आय प्राप्त हो रही है। फालसा की खेती में अपेक्षाकृत कम मेहनत लगती है और उत्पादन भी संतोषजनक होता है।
राज्य सरकार की इस पहल का प्रभाव केवल पौध उत्पादन तक सीमित नहीं है। प्रत्येक जिले की नर्सरियों में तैयार किए जा रहे इन पौधों को सामान्य नागरिकों, किसानों, ग्रामीण महिलाओं, आदिवासी समुदायों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोपित भी किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।
गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि वन विभाग इस वर्ष "ग्रीन गुजरात" अभियान के तहत एक नई और व्यापक योजना लेकर आया है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत नर्सरियों में तैयार किए गए लगभग एक करोड़ पौधों का रोपण किया जा रहा है। इन पौधों की ऊंचाई 8 से 12 फीट तक है और उनका सर्वाइवल रेट 80 से 90 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।
वन मंत्री ने कहा कि पूर्व में भी इस प्रकार के प्रयोग किए गए थे, लेकिन इस बार इसे कहीं अधिक बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। उनका मानना है कि इससे राज्य के ग्रीन कवर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
वन विभाग के अनुसार राज्य की कुल 423 नर्सरियों में इन पौधों को विकसित किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य हर वर्ष एक करोड़ पौधे तैयार करना है, ताकि वृक्षारोपण अभियान को निरंतर गति मिलती रहे। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक जंगलों के संरक्षण के साथ-साथ वन क्षेत्र के विस्तार को भी बढ़ावा देना है।
--आईएएनएस
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