शिमला, 23 जून (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से अनेक ठोस कदम उठाए गए हैं तथा प्राकृतिक खेती को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार देर शाम जनजातीय विकास और बागवानी विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि रसायन-मुक्त कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को अधिक लाभ पहुंचाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बागवानी विभाग को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा तथा विभाग में रिक्त पदों को भी भरा जाएगा।
उन्होंने एचपी-शिवा परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार फलों की विभिन्न किस्मों का विविधीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बागवानी हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और बागवानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।
जनजातीय विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने अधिकारियों को इनके क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत 636 व्यक्तिगत और 20 सामुदायिक दावों को मंजूरी दी गई है। इन दावों के निपटारे के लिए 2259.24 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की गई है।
मुख्यमंत्री ने निचार, पांगी, भरमौर और लाहौल स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। वर्तमान में इन विद्यालयों में 1013 विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
बैठक में बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा, सचिव सी. पालरासू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
--आईएएनएस
डीकेपी/