एक लड़की की डांट ने बदल दी 'भारत कुमार' की जिंदगी, ऐसे छोड़ी मनोज कुमार ने सिगरेट की लत

एक लड़की की डांट ने बदल दी 'भारत कुमार' की जिंदगी, ऐसे छोड़ी मनोज कुमार ने सिगरेट की आदत

मुंबई, 23 जुलाई (आईएएनएस)। देशभक्ति फिल्मों का नाम लेते ही दिमाग में दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार की छवि आ जाती है। उन्होंने पर्दे पर ऐसे किरदार निभाए, जिनमें देश और भारतीय संस्कृति की झलक दिखाई देती थी। यही वजह थी कि दर्शकों ने उन्हें 'भारत कुमार' का नाम दे दिया, जिसके चलते वह अपने इस नाम और छवि को लेकर काफी सजग रहते थे। एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें सिगरेट पीने की लत थी, लेकिन एक अनजान लड़की की कही हुई कुछ बातों ने उनके दिल पर इतना असर किया कि उन्होंने हमेशा के लिए इसे छोड़ दिया।

मनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में हुआ था। उनका असली नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। बचपन से ही उन्हें फिल्मों का बहुत शौक था। वह अभिनेता दिलीप कुमार के बहुत बड़े प्रशंसक थे। दिलीप कुमार की फिल्म 'शबनम' देखने के बाद वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने फिल्म में उनके किरदार के नाम पर अपना नाम मनोज कुमार रख लिया।

फिल्मों में आने का सपना लेकर मनोज कुमार मुंबई पहुंचे। उन्हें साल 1957 में पहली फिल्म 'फैशन' में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में उन्होंने एक बूढ़े भिखारी का रोल निभाया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि पहली बार कैमरे के सामने खड़े होने पर वह काफी डर गए थे। उन्हें कैमरा किसी तोप के गोले जैसा लगता था। हालांकि, उन्होंने धीरे-धीरे इस डर पर काबू पाया।

मनोज कुमार को असली सफलता साल 1965 में आई फिल्म 'शहीद' से मिली। इस फिल्म में उन्होंने क्रांतिकारी भगत सिंह का किरदार निभाया था। फिल्म में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई, और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने 'हरियाली और रास्ता', 'वो कौन थी', 'गुमनाम', 'नील कमल', और 'पत्थर के सनम' जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया।

मनोज कुमार ने सिर्फ अभिनेता के तौर पर ही नहीं बल्कि निर्देशक और लेखक के रूप में भी पहचान बनाई। साल 1967 में उन्होंने फिल्म 'उपकार' बनाई। इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से मिली थी। यह फिल्म शास्त्री जी के नारे 'जय जवान, जय किसान' पर आधारित थी। फिल्म की सफलता के बाद मनोज कुमार को देशभक्ति फिल्मों का सबसे बड़ा चेहरा माना जाने लगा।

उनकी देशभक्ति फिल्मों की वजह से लोग उन्हें 'भारत कुमार' कहने लगे। मनोज कुमार का कहना था कि यह नाम उनके लिए सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी था। यही वजह थी कि जब एक बार एक लड़की ने उन्हें सिगरेट पीते देखा तो उसकी बात मनोज कुमार के दिल को छू गई।

मनोज कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एक समय उन्हें सिगरेट पीने की लत थी। एक दिन वह अपने परिवार के साथ एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गए थे। वहां वह सिगरेट पी रहे थे, तभी एक लड़की उनके पास आई और उन्हें डांटते हुए कहा, ''आप भारत होकर सिगरेट पी रहे हैं, आपको शर्म नहीं आती?'' लड़की की यह बात उन्हें अंदर तक छू गई। उन्हें लगा कि लोग उन्हें सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि 'भारत कुमार' के रूप में देखते हैं। इसके बाद उन्होंने सिगरेट छोड़ने का फैसला कर लिया।

मनोज कुमार ने अपने करियर में कई बड़ी फिल्में दीं। साल 1974 में आई उनकी फिल्म 'रोटी कपड़ा और मकान' भी बड़ी सफल रही। इसके बाद उन्होंने 1981 में 'क्रांति' बनाई, जिसमें दिलीप कुमार, हेमा मालिनी और शशि कपूर जैसे बड़े कलाकार नजर आए। यह फिल्म भी दर्शकों को काफी पसंद आई।

मनोज कुमार को उनके शानदार योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें साल 1992 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर पुरस्कार मिले। साल 2015 में भारत सरकार ने उन्हें सिनेमा के सबसे बड़े सम्मानों में से एक दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। उनका निधन 4 अप्रैल 2025 को 87 साल की उम्र में हुआ।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम