नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) पेशे को देश की आर्थिक व्यवस्था की मजबूत नींव बताते हुए उन्हें "विश्वास के राजदूत" की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि भारत के 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक शासन व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स डे एवं स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति केवल आंकड़ों से नहीं मापी जा सकती। उन्होंने कहा, "नैतिकता के बिना आर्थिक विकास कभी भी समाज की सच्ची सेवा नहीं कर सकता।"
उपराष्ट्रपति ने आईसीएआई की कड़ी परीक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान को अपने परीक्षा मानकों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कठोर और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली ही योग्य पेशेवर तैयार करती है और इससे पूरे वित्तीय तंत्र की विश्वसनीयता बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि "आप केवल परीक्षा नहीं लेते, बल्कि पूरे सिस्टम की सुरक्षा कर रहे हैं।"
सी.पी. राधाकृष्णन ने आगे कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने तेज आर्थिक प्रगति की है और आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित 'विकसित भारत 2047' का सपना केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका आधार पारदर्शी शासन, भरोसेमंद संस्थाएं, सभी के लिए समान अवसर और प्रत्येक नागरिक की समृद्धि है।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने प्रसिद्ध तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर का उल्लेख करते हुए कहा कि ईमानदारी और नैतिक तरीके से अर्जित धन ही स्थायी सुख और समृद्धि देता है।
उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से अपील की कि वे ईमानदार कारोबारियों की रक्षा करें, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दें और अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ मजबूती से खड़े हों। उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस जरूरी है, लेकिन यह हमेशा कानून के दायरे में रहकर ही होना चाहिए और इस संतुलन को बनाए रखने में सीए की भूमिका अहम है।
उपराष्ट्रपति ने आगे कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने देश के कई बड़े आर्थिक सुधारों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और कर सुधारों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने में सीए समुदाय की विशेषज्ञता का बड़ा योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से पारदर्शिता बढ़ी है, अनुपालन मजबूत हुआ है और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ा है।
छात्रों और पेशेवरों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा किया गया प्रत्येक ऑडिट, प्रमाणित की गई हर बैलेंस शीट और दी गई हर वित्तीय सलाह का प्रभाव केवल किसी कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सरकार, उद्योग और पूरे समाज पर पड़ता है।
उन्होंने सभी सीए से अपने पूरे पेशेवर जीवन में उच्चतम स्तर की ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखने का आग्रह किया। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स से 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी)' योजना के तहत स्थानीय उद्यमों को सहयोग देने की भी अपील की।
उन्होंने सुझाव दिया कि आईसीएआई की जिला स्तरीय इकाइयां अपने-अपने क्षेत्रों के प्रमुख उत्पादों की बेहतर जानकारी विकसित करें, ताकि वे स्थानीय उद्यमियों को लागत कम करने, गुणवत्ता बनाए रखने और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मार्गदर्शन दे सकें। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने आईसीएआई पीयर रिव्यू बोर्ड (पीआरबी) वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके अलावा उन्होंने भारत सरकार के मायगव के सहयोग से विकसित आईसीएआई जन उत्सव पोर्टल भी लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य 78वें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स डे समारोह में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
--आईएएनएस
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