दिल्ली शब्दोत्सव 2026 : उत्तर-दक्षिण के बीच विवाद खड़ा करने पर सुधांशु त्रिवेदी का बेबाक अंदाज, युवाओं के लिए पढ़ी ये शायरी

दिल्ली शब्दोत्सव 2026: उत्तर-दक्षिण के बीच विवाद खड़ा करने पर सुधांशु त्रिवेदी का बेबाक अंदाज, युवाओं के लिए पढ़ी ये शायरी

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। नई दिल्ली में शब्दोत्सव 2026 का आयोजन किया गया है। दूसरे दिन के शब्दोत्सव में भाजपा राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी और हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ चुनाव लड़ चुकीं माधवी लता शामिल हुईं।

कार्यक्रम में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारत की संस्कृति एकमात्र ऐसी संस्कृति है जिसमें हर शब्द एक उत्सव होता है, इसलिए प्राचीन काल में अगर हमारे वेद छंदों में लिखे गए, तो वहां से मंदिरों में होने वाले भजन और रामचरितमानस की चौपाइयों तक हर शब्द छंद में लिखा गया है।

दक्षिण भारत में भाजपा के उत्थान को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है जब भाजपा ने तिरुवनंतपुरम के नगर निगम चुनाव में स्पष्ट बहुमत पाकर केरल की राजधानी में अपना प्रभुत्व स्थापित किया है। यह सिर्फ राजनीतिक विषय नहीं है, बल्कि पिछले दस सालों में दक्षिण भारत में अभूतपूर्व काम हुए हैं। अटल की सरकार के समय में माइक्रोसॉफ्ट ने जब अमेरिका के बाहर अपना कोई दफ्तर खोला तो वह बेंगलुरु में खोला।

उन्होंने कहा कि अमेजन भी अमेरिका के बाहर अपना सबसे बड़ा ऑफिस हैदराबाद में बना रहा है। आईफोन ने अपनी सबसे बड़ी फैक्ट्री बेंगलुरु और कर्नाटक में बनाई है। चिप बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी चीन के बाहर कर्नाटक और तमिलनाडु में अपनी फैक्ट्री बना रही है। इसके साथ ही भारत सरकार ने दो डिफेंस कॉरिडोर बनाए हैं, एक उत्तर भारत के लिए और दूसरा दक्षिण भारत के लिए।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि उत्तर भारत वाला कॉरिडोर तो उत्तर प्रदेश में है, जहां हमारी सरकार है। दूसरा तमिलनाडु में है, जहां हमारी सरकार नहीं है। हम वहां कोई प्रभावी राजनीतिक शक्ति के रूप में नहीं माने जाते। यह दर्शाता है कि दक्षिण के अंदर कितना बदलाव आ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर और दक्षिण के बीच एक विचित्र वातावरण बनाने का प्रयास लंबे समय से किया जाता रहा। यह भारत के तमाम विशिष्ट प्रतिष्ठानों की तरफ से किया जा रहा था, जो सत्य से बिल्कुल परे था।

उन्होंने कहा कि भाषाई, प्रांतीय और जातीय पहचान के आधार पर किस तरह विवाद खड़ा करने की कोशिश हुई, हमें इसकी पहचान करने की जरूरत है। उन्होंने वर्तमान का उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु के एक मंत्री ने साल 2023 के चुनाव में कहा था कि भाजपा सिर्फ गोमूत्र वाले राज्यों में ही जीत सकती है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि गोमूत्र का एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल औषधीय उपचार अमेरिका में पेटेंट है। इसके साथ ही उन्होंने पेटेंट का नंबर बताते हुए सवाल किया कि मंत्री को इसकी जानकारी ही नहीं है और वह उत्तर-दक्षिण के बीच मतभेद करने के लिए षड्यंत्र और कुचक्र रच रहे हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने उत्तर-दक्षिण भारत के बीच संबंध बताते हुए कहा कि जब श्रीराम जन्मभूमि का उद्घाटन होना था, तब प्रधानमंत्री ने 11 दिन का उपवास रखकर भारत के जिन-जिन मंदिरों का भ्रमण किया था, उनमें तमिलनाडु का रंगनाथस्वामी मंदिर भी शामिल है। वहां की मान्यता है कि अयोध्या के जो कुलदेवता हैं, वे रंगनाथस्वामी के रूप में वहां विराजमान हैं। देश किस तरह से जुड़ा हुआ है, लेकिन जोड़ने का भाव न देखकर उसे तोड़ने का प्रयास किया जा रहा था।

दक्षिण भारत में भाजपा की पहुंच और लोगों के जुड़ने पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि तमिलनाडु की अधिकतर राजनीतिक पार्टियों के नाम में 'द्रविड़' शब्द का उपयोग किया गया है, लेकिन 'द्रविड़' शब्द तमिल भाषा का है ही नहीं। 'द्रविड़' एक संस्कृति है, जिसका अर्थ है 'जो क्षेत्र जल से घिरा है, उसे द्रविड़ कहा जाता है।'

उन्होंने कहा कि ओवैसी कहते हैं कि जब योगी मठ में चले जाएंगे और मोदी हिमालय पर चले जाएंगे, तो तुम्हें बचाने कौन आएगा। मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि ओवैसी को सबक सिखाने, दंड देने की जरूरत नहीं है। हैदराबाद के चुनाव में रेवंत रेड्डी ने क्या कहा? 'कांग्रेस मतलब मुसलमान और मुसलमान मतलब कांग्रेस।' अब मुसलमान और मुसलमान के बीच मुकाबला है। ये दोनों आपस में एक-दूसरे का काम तमाम कर देंगे।

उन्होंने कहा कि उत्तर और दक्षिण को आपस में लड़ाने के लिए तरह-तरह के तरीके खोजे जाते हैं। हमारे यहां विविधता है और उसे विभाजकता बनाने की कोशिश होती है। उन्होंने कहा कि ओवैसी कभी कहते हैं कि मुझे तमिल में बोलना है? कभी असम के बदरुद्दीन कहते हैं कि मुझे असमिया बोलना है? महबूबा मुफ्ती कश्मीरी भाषा और मौलाना मदनी कभी तमिल भाषा में बोलने की बात करते हैं? उन्होंने कहा कि केरल और कश्मीर के मुस्लिम सब एक ही बात कहते हैं। लखनऊ और हैदराबाद के मुसलमानों को अलग-अलग भाषा बोलते नहीं देखा होगा।

उन्होंने कहा कि इस पर गंभीरता से सोचिए। विभाजन की बात यहीं नहीं रुकती है। मुस्लिम समाज में निचली जाति के लोगों को ऊंची जाति के लोगों के खिलाफ नहीं खड़ा कर सकते, लेकिन हमारे यहां (हिंदू धर्म) अगड़े-पिछड़े को लड़ाया जाएगा। भाषा के आधार पर लड़ाया जाएगा। सबके अंदर जलन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

सुधांशु त्रिवेदी ने युवाओं से कहा कि प्रेम में कभी ब्रेकअप नहीं होता और ब्रेकअप हो जाए, तो वह प्रेम ही नहीं होता। आंखों से उतरकर अफसाना कब नीले ड्रम में पहुंच जाए, पता नहीं चलता। इसलिए आप अपने भविष्य को लेकर स्पष्ट रहिए।

उन्होंने सभी बच्चियों से अपील करते हुए कहा कि रामायण में जब रावण सीताहरण के लिए आया, तो असली वेश में नहीं आया था। वह साधु बनकर आया था, इसलिए किसी के चेहरे पर मत जाइएगा। उन्होंने कहा, "बिटिया, इस संसार में संभलकर चलियो जाए, न जाने किस वेश में कब रावण मिल जाए।" उन्होंने लड़कों से कहा, "बेटे, इस संसार में संभलकर चलियो जाए, न जाने किस मोड़ पर कब शूर्पणखा मिल जाए।"

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी