कॉलेज के नाटक में देवेन वर्मा को देख बी.आर. चोपड़ा ने दिया था पहला ब्रेक, 600 रुपए थी पहली सैलरी

कॉलेज के नाटक में देवेन वर्मा को देख बी.आर. चोपड़ा ने दिया था पहला ब्रेक, 600 रुपए थी पहली सैलरी

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने अपनी एक्टिंग से दर्शकों को खूब हंसाया। ऐसे ही कलाकारों में देवेन वर्मा का नाम शामिल है। अपनी कॉमेडी और शानदार टाइमिंग से पहचान बनाने वाले देवेन ने करीब पांच दशक तक फिल्मों में काम किया, हालांकि उनकी फिल्मी दुनिया में एंट्री किसी बड़े ऑडिशन या फिल्मी परिवार के सहारे नहीं हुई।

वह कॉलेज के दिनों में नाटकों और यूथ फेस्टिवल में हिस्सा लिया करते थे। एक कार्यक्रम में उनकी परफॉर्मेंस देखने के बाद मशहूर फिल्ममेकर बी.आर. चोपड़ा ने उन्हें फिल्म 'धर्मपुत्र' में काम करने का मौका दिया। उस समय देवेन को इसके लिए हर महीने 600 रुपए मिलते थे।

देवेन वर्मा का जन्म 23 अक्टूबर 1937 को हुआ था। उनका परिवार बाद में पुणे में रहने लगा, जहां उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। उन्होंने पुणे के नॉरोजी वाडिया कॉलेज से पॉलिटिक्स और सोशियोलॉजी की पढ़ाई की। कॉलेज में रहते हुए उन्हें नाटकों और स्टेज परफॉर्मेंस में दिलचस्पी होने लगी। वह यूथ फेस्टिवल में हिस्सा लेते थे और ड्रामा ग्रुप के साथ भी जुड़े हुए थे। फिल्मों के कलाकारों की नकल करने में भी उन्हें मजा आता था। देवेन ने 2013 में एक इंटरव्यू में बताया था कि वह स्टेज शो किया करते थे। एक दिन नॉर्थ इंडिया पंजाबी एसोसिएशन के कार्यक्रम में वह एक नाटक पेश कर रहे थे। वहां बी.आर. चोपड़ा भी मौजूद थे। उनकी परफॉर्मेंस देखकर बी.आर. चोपड़ा ने उन्हें अपनी फिल्म 'धर्मपुत्र' में काम करने का मौका दिया।

साल 1961 में रिलीज हुई 'धर्मपुत्र' से देवेन ने फिल्मों में कदम रखा। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद वह कुछ समय के लिए विदेश में स्टेज शो करने चले गए। बाद में उन्हें एवीएम स्टूडियो के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने करीब तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर काम किया और एक्टिंग की ट्रेनिंग भी ली। साल 1963 में आई फिल्म 'गुमराह' में उन्होंने अशोक कुमार के नौकर का किरदार निभाया। यह एक कॉमिक रोल था और दर्शकों ने उनके काम को पसंद किया। इसके बाद वह 'आज और कल', 'अनुपमा' और 'कहीं और चल' जैसी फिल्मों में भी नजर आए।

देवेन को पहचान मिलने में कुछ साल लगे, लेकिन उन्होंने अपने काम से फिल्म इंडस्ट्री में जगह बना ली। साल 1975 में आई फिल्म 'चोरी मेरा काम' उनके करियर की अहम फिल्म साबित हुई। इसमें उनके कॉमिक अंदाज को पसंद किया गया और उन्हें इस फिल्म के लिए 1976 में फिल्मफेयर का बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड मिला। इसके बाद 'चोर के घर चोर' के लिए 1979 और 'अंगूर' के लिए 1983 में उन्हें इसी कैटेगरी में फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इस तरह वह तीन बार यह सम्मान जीतने में सफल रहे।

देवेन वर्मा ने 'गोलमाल', 'खट्टा मीठा', 'बुद्धा मिल गया', 'रंग बिरंगी', 'नास्तिक' और 'अंदाज अपना अपना' जैसी फिल्मों में भी काम किया। फिल्म 'अंगूर' में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है। वह सिर्फ अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर भी काम कर चुके थे। साल 1969 में आई फिल्म 'यकीन' के साथ उन्होंने प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने 'बेशर्म' जैसी फिल्म का निर्देशन भी किया।

देवेन वर्मा का 2 दिसंबर 2014 को पुणे में निधन हो गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, किडनी फेल होने की वजह से उनकी मौत हुई थी।

--आईएएनएस

पीके/वीसी