नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को निर्यात प्रोत्साहन मिशन (ईपीएम) के तहत सात अतिरिक्त उपायों को लॉन्च किया। ईपीएम वाणिज्य विभाग की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजारों के लिए सशक्त बनाना है।
इन उपायों का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना, व्यापक और समावेशी निर्यात वृद्धि को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात शक्ति के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करना है।
केंद्र ने जिन सात अतिरिक्त उपायों को लॉन्च किया है, उनमें वैकल्पिक व्यापार साधनों (निर्यात फैक्टरिंग) के लिए सहायता, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता, उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता, व्यापार विनियम, प्रत्यायन एवं अनुपालन सक्षमीकरण (टीआरएसीई), लॉजिस्टिक्स, ओवरसीज वेयरहाउसिंग एंड फुलफिलमेंट की सुविधा प्रदान करना (एफएलओडब्ल्यू), माल ढुलाई एवं परिवहन हेतु लॉजिस्टिक्स उपाय (एलआईएफटी) और व्यापार खुफिया एवं सुगमीकरण के लिए एकीकृत सहायता (इनसाइट) शामिल हैं।
वैकल्पिक व्यापार साधनों (निर्यात फैक्टरिंग) के लिए सहायता के तहत लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए किफायती कार्यशील पूंजी समाधान के रूप में निर्यात फैक्टरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा।
आरबीआई/आईएफएससीए द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से किए गए पात्र लेनदेन पर फैक्टरिंग लागत पर 2.75 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सहायता की अधिकतम सीमा प्रति एमएसएमई 50 लाख रुपए सालाना है और पारदर्शिता और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के लिए इसे डिजिटल दावा तंत्र के माध्यम से संसाधित किया जाएगा।
ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए ऋण सहायता के तहत डिजिटल चैनलों का उपयोग करने वाले निर्यातकों को सहयोग देने के लिए, ब्याज सब्सिडी और आंशिक ऋण गारंटी के साथ संरचित ऋण सुविधाएं आरंभ की गई हैं। डायरेक्ट ई-कॉमर्स क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ 50 लाख रुपए तक की सहायता प्रदान की जाएगी। ओवरसीज इन्वेंटरी क्रेडिट फैसिलिटी के तहत 75 प्रतिशत गारंटी कवरेज के साथ 5 करोड़ रुपए तक की सहायता प्रदान की जाएगी। प्रति आवेदक 15 लाख रुपए की वार्षिक सीमा के अधीन, 2.75 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी उपलब्ध होगी।
उभरते निर्यात अवसरों के लिए सहायता के अंतर्गत निर्यातकों को विभिन्न साझा जोखिम और ऋण साधनों के माध्यम से नए या उच्च जोखिम वाले बाजारों तक पहुंच बनाने में सक्षम बनाया जाएगा। इन संरचित तंत्रों का उद्देश्य निर्यातकों के आत्मविश्वास और तरलता प्रवाह को सुदृढ़ करना है।
टीआरएसीई निर्यातकों को अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण, निरीक्षण, प्रमाणन और अन्य अनुरूपता आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करता है। पात्र परीक्षण, निरीक्षण और प्रमाणन व्यय के लिए सकारात्मक सूची के अंतर्गत 60 प्रतिशत और प्राथमिकता सकारात्मक सूची के अंतर्गत 75 प्रतिशत की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जो प्रति आईईसी 25 लाख रुपए की वार्षिक सीमा के अधीन है।
एफएलओडब्ल्यू निर्यातकों को ओवरसीज वेयरहाउसिंग और फुलफिलमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच बनाने में सहायता करता है, जिसमें वैश्विक वितरण नेटवर्क से जुड़े ई-कॉमर्स निर्यात हब शामिल हैं। स्वीकृत परियोजना लागत के 30 प्रतिशत तक की सहायता अधिकतम तीन वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी, जो निर्धारित सीमाओं और एमएसएमई भागीदारी मानदंडों के अधीन है।
एलआईएफटी निम्न निर्यात तीव्रता वाले जिलों में निर्यातकों द्वारा सामना की जाने वाली भौगोलिक कठिनाइयों को कम करता है। पात्र माल ढुलाई व्यय के 30 प्रतिशत तक की आंशिक प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जो प्रति वित्तीय वर्ष प्रति निर्यातक के लिए 20 लाख रुपए की सीमा के अधीन होगी।
इनसाइट, निर्यातकों की क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करता है, 'जिलों को निर्यात केंद्र' पहल के तहत जिलों और क्लस्टर स्तर पर सुविधा प्रदान करता है, और व्यापार खुफिया प्रणालियों का विकास करता है। वित्तीय सहायता परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के संस्थानों और विदेशों में भारतीय दूतावासों से प्राप्त प्रस्तावों के लिए अधिसूचित सीमाओं के अधीन 100 प्रतिशत तक सहायता प्रदान की जाती है।
इससे पहले तीन उपाय - बाजार पहुंच सहायता, निर्यात ऋण के लिए पूर्व और पश्चात शिपमेंट पर ब्याज सब्सिडी और निर्यात ऋण के लिए संपार्श्विक सहायता - पहले से ही कार्यान्वयन के अधीन हैं। इस शुभारंभ के साथ, ईपीएम के तहत प्रस्तावित 11 उपायों में से 10 अब प्रचालनगत हैं।
--आईएएनएस
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