मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को दुनिया भर में एक 'हीरो' के तौर पर सराहा जा रहा है। कैप्टन स्मित मच्छार से जुड़ी घटना के बाद उनकी सहकर्मी पायलट टीना गोस्वामी ने आईएएनएस से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि जब उन्हें पहली बार इस घटना के बारे में पता चला तो उनकी सबसे पहली प्रतिक्रिया यही थी कि आखिर सब ठीक है या नहीं। उन्होंने कहा कि यह सामान्य स्थिति नहीं थी, बल्कि बेहद गंभीर और असामान्य परिस्थिति थी।
टीना गोस्वामी ने आईएएनएस से खास बातचीत में बताया कि एक पायलट के तौर पर आपात स्थिति से निपटने की जो ट्रेनिंग दी जाती है, उसमें टीमवर्क और क्रू कोऑर्डिनेशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन, इस घटना में खतरा विमान के बाहर से नहीं, बल्कि अंदर से पैदा हुआ था, जिसने सभी को हैरान कर दिया।
टीना गोस्वामी ने कहा कि शुरुआत में घटना के बारे में सुनकर सभी को झटका लगा था। आम तौर पर पायलट की ट्रेनिंग और आपात स्थितियों से निपटने की प्रक्रिया टीमवर्क और क्रू कोऑर्डिनेशन पर निर्भर करती है। लेकिन, जब हमें पता चला कि खतरा बाहर से नहीं, बल्कि विमान के अंदर ही है, तो यह हमारे लिए बेहद चौंकाने वाली बात थी। बाद में जब पता चला कि उन्होंने स्थिति को संभाल लिया और इतने लोगों की जान बच गई, तो बहुत राहत मिली।
उन्होंने कैप्टन मच्छार की उस कोशिश का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अपनी आखिरी ताकत लगाकर दरवाजा खोलने का प्रयास किया। टीना ने कहा कि इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात उनकी विपरीत परिस्थितियों में तुरंत सही निर्णय लेने की क्षमता थी। कैप्टन मच्छार उस समय घायल थे और विमान भी अनियंत्रित स्थिति में था। ऐसे में उन्हें यह समझ आ गया था कि वह कॉकपिट से ज्यादा कुछ नहीं कर पाएंगे। इसलिए उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की, ताकि कम से कम किसी तरह लोगों के बचने की संभावना बन सके।
टीना गोस्वामी ने कहा कि यह फैसला बेहद कठिन परिस्थिति में लिया गया था। उन्हें पता था कि जिस स्थिति में वह घायल हैं और जिस तरह विमान अनियंत्रित हो चुका है, उसमें वह ज्यादा कुछ नहीं कर पाएंगे। ऐसे में दरवाजा खोलने की कोशिश करना ही शायद वह कदम था, जिससे कुछ लोगों के बचने की संभावना बन सकती थी। यही उनकी सबसे बड़ी प्रेजेंस ऑफ माइंड थी। उनके इस प्रयास को केवल विमान में सवार यात्रियों की संख्या के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, विमान में करीब 175 से 180 यात्रियों की जान बचने के साथ-साथ एक संभावित बड़ी त्रासदी को भी टाला गया।
उन्होंने कहा कि अगर परिस्थितियां और बिगड़ती तो इसका असर कहीं अधिक गंभीर हो सकता था। इसलिए कैप्टन मच्छार के प्रयास को एक बड़ी घटना को टालने के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। इस घटना ने देश और एविएशन कम्युनिटी को भी गर्व महसूस कराया है। उन्होंने पूरे देश के साथ-साथ पायलट कम्युनिटी और एविएशन कम्युनिटी का नाम भी रोशन किया है। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है।
कैप्टन मच्छार के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए टीना गोस्वामी ने बताया कि दोनों की मुलाकात वर्ष 2022 के अंत में हुई थी। उन्होंने बताया कि दोनों सहकर्मी हैं और फ्लाइट डिस्पैच ऑफिस में अक्सर उनकी मुलाकात होती थी। पायलट अपनी उड़ान से पहले डिस्पैच ऑफिस में जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करते हैं, दस्तावेज हासिल करते हैं और अन्य औपचारिकताएं पूरी करते हैं। इसी दौरान उनकी कैप्टन मच्छार से कई बार मुलाकात हुई।
टीना ने कहा कि कैप्टन मच्छार का व्यवहार हमेशा सम्मानजनक रहा। वह उनकी तारीफ सिर्फ इसलिए नहीं कर रही हैं क्योंकि उन्होंने इतनी बड़ी घटना से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी वह उन्हें एक अच्छा इंसान मानती हैं। जब भी हम मिलते थे, वह बहुत सम्मान के साथ बात करते थे। किसी सहकर्मी से किस तरह बात करनी है, अपने साथ काम करने वाले लोगों और फर्स्ट ऑफिसर्स के साथ किस तरह व्यवहार करना है, यह उनके व्यक्तित्व का हिस्सा था।
टीना ने बताया कि किसी पायलट की पहचान केवल उसकी फ्लाइंग स्किल से नहीं होती। उसका स्वभाव, रवैया और सहकर्मियों के साथ उसका व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इस लिहाज से कैप्टन मच्छार का व्यक्तित्व बेहद अच्छा है। लंबे अनुभव के बाद पायलट को विमान के व्यवहार का अंदाजा केवल उपकरणों से नहीं, बल्कि अपनी अनुभूति से भी होने लगता है। एविएशन में इसे ‘फीलिंग ऑफ फ्लाइट’ कहा जाता है। पायलटों के लिए ‘कंट्रोल रेस्ट’ जैसी परिस्थितियों में भी विमान के व्यवहार को महसूस करना संभव होता है। आंखें बंद होने की स्थिति में भी अनुभवी पायलट को पता चल सकता है कि विमान किस तरह उड़ रहा है और उसके व्यवहार में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं आया।
--आईएएनएस
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