जामनगर, 2 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मेडिकल वैल्यू टूरिज्म को बढ़ावा देने और आयुष इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने की घोषणा की है। इसे हकीकत बनाने के लिए सरकार का फोकस क्वालिटी हेल्थकेयर, रिसर्च, रोजगार पैदा करने और ग्लोबल पहुंच पर है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करते हुए कई बड़े बदलाव वाले उपायों की रूपरेखा बताई, जिनका मकसद भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करना और भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की अंतरराष्ट्रीय पहचान को बढ़ाना है। इस पहल के तहत प्रस्तावित क्षेत्रीय मेडिकल हब में आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म सुविधा केंद्र, और डायग्नोस्टिक्स, इलाज, इलाज के बाद की देखभाल और पुनर्वास के लिए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर होगा। उम्मीद है कि ये हब अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों तरह के मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाएंगे। साथ ही डॉक्टरों, संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे।
इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद, जामनगर (गुजरात) की निदेशक प्रो. डॉ. तनुजा नेसारी ने इन घोषणाओं का स्वागत करते हुए आयुष क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए बजटीय समर्थन के लिए सरकार को धन्यवाद दिया।
डॉ. नेसारी ने कहा कि हम भारत सरकार के आभारी हैं कि उसने आयुष सिस्टम के लिए लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की और डब्ल्यूएचओ के माध्यम से वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत किया। बजट की एक मुख्य बात जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को अपग्रेड करने का फैसला है, जो आयुष मंत्रालय के तहत काम करता है। इस अपग्रेड का मकसद पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के साक्ष्य-आधारित रिसर्च, ट्रेनिंग और वैश्विक जागरूकता को बढ़ाना है।
डॉ. नेसारी ने बजट की पहलों को सच में जबरदस्त बताया और कहा कि ये भारत को आयुष सेवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने में मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पहलें तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, क्लिनिकल देखभाल और रिसर्च को मजबूत करेंगी। आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं का अपग्रेडेशन उच्च गुणवत्ता मानकों, सर्टिफिकेशन और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर का विस्तार विश्व मंच पर पारंपरिक चिकित्सा में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करेगा। हाल के वर्षों में पारंपरिक स्वास्थ्य में भारत की वैश्विक पहचान में लगातार बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के बाद योग को दुनिया भर में पहचान मिली, जबकि आयुर्वेद को कोविड के बाद के दौर में फिर से ग्लोबल एक्सेप्टेंस मिली है।
आयुष प्रोडक्ट्स की बढ़ती इंटरनेशनल डिमांड से औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों के साथ-साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन में लगे युवाओं को भी फायदा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, नई पहलों का मकसद पारंपरिक तरीकों को आधुनिक हेल्थकेयर फ्रेमवर्क के साथ जोड़ना, भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाना और देश को समग्र और सबूत-आधारित हेल्थकेयर के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है।
आयुष सेक्टर के स्टेकहोल्डर्स ने सरकार के समर्थन की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव और आयुष मंत्रालय के सचिव पद्म राजेश कोटेचा को आयुर्वेद और व्यापक आयुष इकोसिस्टम के लिए प्रोत्साहन देने वाली और दूरदर्शी घोषणाओं के लिए धन्यवाद दिया।
--आईएएनएस
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