नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और रूस के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास इंद्र का समुद्री चरण शुरू होने जा रहा है। रूस में हो रहे इस अभ्यास के समुद्री चरण की तैयारियां पूरी हो गई हैं। यह अभ्यास 18 अक्टूबर तक जारी रहेगा। इसके लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और रूसी नौसेना के युद्धपोत अल्दार त्सिदेनझापोव की संचालन टीमों के बीच योजना सम्मेलन आयोजित किया गया।
इसमें रूसी बेड़े के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया। यहां समुद्री अभ्यास के लिए व्यापक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्र में होने वाली गतिविधियों की योजना पर चर्चा हुई। समुद्री अभ्यास से पहले दोनों देशों की नौसेना ने बंदरगाह में आयोजित अभ्यास का पहला चरण पूरा किया है। इसका उद्देश्य आगामी समुद्री गतिविधियों के लिए दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करना था।
इस बंदरगाह यात्रा के दौरान आईएनएस सह्याद्रि के प्रतिनिधिमंडल ने रूसी बेड़े की मिश्रित सेनाओं के प्रिमोर्स्की फ्लोटिला के कमांडर वाइस एडमिरल ए. वाई. सिसुएव के साथ औपचारिक बैठक भी की। भारत और रूस की मजबूत दोस्ती को और आगे बढ़ाते हुए 13 अक्टूबर से यह अभियान शुरू हुआ था। इस अभ्यास के दौरान भारत-रूस की पुरानी रक्षा साझेदारी को और अधिक मजबूती मिलेगी।
18 अक्टूबर तक चलने वाले इस नौसैनिक अभ्यास का उद्देश्य भारत व रूसी नौसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। साथ दोनों नौसेनाएं एक-दूसरे के संचालन तरीकों को समझ रही हैं और समुद्र में मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत कर रही हैं। यहां दोनों देशों के बीच बंदरगाह से समुद्र तक तालमेल स्थापित किया जा रहा है।
'इंद्र-2026' के तहत दो अलग-अलग चरण आयोजित किए जा रहे हैं। पहले चरण में बंदरगाह पर विभिन्न गतिविधियां हुईं। इस दौरान पेशेवर बातचीत और समुद्री गतिविधियों के माध्यम से दोनों नौसेनाओं ने अपने अनुभव साझा किए। इससे संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिली। इसके बाद अब दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्र में मिलकर अभ्यास करने जा रही हैं।
गौरतलब है कि बीते दिनों भारत और रूस के बीच नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण वार्ता हुई थी। यह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गति देने की दिशा में एक अहम बैठक थी। बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा सैन्य-तकनीकी सहयोग की समीक्षा की गई। इसके साथ-साथ रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास की नई संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। यह बैठक दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
--आईएएनएस
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