भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस पर हिमाचल से 16 अक्टूबर से निकलेगी दो दिवसीय शोभायात्रा

भगवान वाल्मीकि प्रकट दिवस पर हिमाचल से 16 अक्टूबर से निकलेगी दो दिवसीय शोभायात्रा

कुल्लू, 27 सितंबर (आईएएनएस)। भगवान वाल्मीकि महाराज के प्रकट दिवस के अवसर पर भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की ओर से हिमाचल प्रदेश से पावन वाल्मीकि तीर्थ के लिए तीसरी दो दिवसीय बस यात्रा एवं शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता में संत समाज और भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के पदाधिकारियों ने यात्रा की तैयारियों और इसके उद्देश्यों की जानकारी दी। यात्रा 16 और 17 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी।

स्वामी गिरिधारी नाथ महाराज ने प्रेस वार्ता में कहा कि भगवान वाल्मीकि महाराज के प्रकट दिवस को हर वर्ष की तरह इस बार भी पूरे हिमाचल प्रदेश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। हिमाचल के विभिन्न क्षेत्रों से वाल्मीकि समाज के लोग और पदाधिकारी इस यात्रा में शामिल होंगे। यात्रा का उद्देश्य समाज को भगवान वाल्मीकि महाराज की शिक्षाओं और धर्म से जोड़ना तथा समाज में धार्मिक एवं सामाजिक एकता को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि यात्रा की तैयारियों में पूरी टीम सक्रिय रूप से जुटी हुई है। इससे पहले मनाली और धर्मशाला से भी यात्राएं निकाली जा चुकी हैं। अब हिमाचल से पावन वाल्मीकि तीर्थ के लिए यात्रा निकाली जाएगी, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से वाल्मीकि समाज के श्रद्धालु पहुंचेंगे।

स्वामी गिरिधारी नाथ महाराज ने कहा कि यात्रा के दौरान हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से वाल्मीकि समाज की समितियों और पदाधिकारियों की सहभागिता रहेगी। जगह-जगह यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत एवं सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पावन वाल्मीकि तीर्थ पर भगवान वाल्मीकि महाराज की पालकी को फूलों से सजाकर श्रद्धापूर्वक ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि महाराज का स्थान वाल्मीकि समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ है। भगवान वाल्मीकि ने रामायण की रचना कर मानव समाज को सत्य, धर्म, मर्यादा और सदाचार का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि हिमाचल की धरती से वाल्मीकि समाज के लोगों को अपने गुरु और धार्मिक स्थान से जोड़ने का यह प्रयास समाज को संगठित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर पंजाब सरकार के दलित विकास बोर्ड के अध्यक्ष विजय दानव ने हिमाचल प्रदेश के वाल्मीकि समाज के लोगों का अभिनंदन करते हुए कहा कि भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज एक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन है, जिसकी गतिविधियां देश-विदेश में संचालित होती हैं। उन्होंने बताया कि 16 और 17 अक्टूबर को पावन वाल्मीकि तीर्थ के लिए दो दिवसीय बस यात्रा आयोजित की जा रही है। यह हिमाचल से निकलने वाली तीसरी यात्रा होगी।

विजय दानव ने कहा कि पंजाब पहुंचने पर हिमाचल से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि पिछली यात्राओं के दौरान भी श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया था और इस बार भी किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था भी की गई है। पहला पड़ाव शीरपुर में होगा, जिसके बाद श्रद्धालु पावन वाल्मीकि तीर्थ पहुंचेंगे।

उन्होंने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य परमपिता परमात्मा भगवान वाल्मीकि महाराज की शिक्षाओं को समाज तक पहुंचाना और नई पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति तथा गुरु की शिक्षाओं से जोड़ना है। संत-महापुरुषों की विचारधारा और मार्गदर्शन के अनुरूप भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है।

विजय दानव ने कहा कि हिमाचल से पावन वाल्मीकि तीर्थ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का पंजाब की जनता और संत समाज की ओर से स्वागत किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे और इससे समाज में धार्मिक चेतना एवं आपसी भाईचारा मजबूत होगा।

स्वामी परगट नाथ महाराज ने भी भगवान वाल्मीकि महाराज के जयकारों के साथ समाज के लोगों को यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भगवान वाल्मीकि महाराज का प्रकट दिवस समाज के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर पर आयोजित होने वाली शोभायात्रा में हिमाचल प्रदेश के लोगों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई।

उन्होंने कहा कि 16 और 17 अक्टूबर को हिमाचल से पावन वाल्मीकि तीर्थ के लिए तीसरी शोभायात्रा लक्की और उनकी टीम के नेतृत्व में निकाली जाएगी। उन्होंने हिमाचल के सभी वाल्मीकि समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे यात्रा में पूरा सहयोग दें। उन्होंने कहा कि जब यह यात्रा पंजाब पहुंचेगी तो वहां के वाल्मीकि समाज और संत समाज की ओर से भी श्रद्धालुओं का पूरा सहयोग और स्वागत किया जाएगा।

आयोजकों ने हिमाचल प्रदेश के सभी जिलों से वाल्मीकि समाज के पदाधिकारियों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और श्रद्धालुओं से इस यात्रा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और आने वाली पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का माध्यम भी है।

--आईएएनएस

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