बाजार की पाठशाला: बच्चे का सुरक्षित भविष्य चाहिए? जानें कैसे 'एनपीएस वात्सल्य योजना' बन सकती है बेहतरीन विकल्प

बाजार की पाठशाला: बच्चे का सुरक्षित भविष्य चाहिए? जानें कैसे 'एनपीएस वात्सल्य योजना' बन सकती है बेहतरीन विकल्प

नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। अगर आप भी अपने बच्चे के भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना चाहते हैं, तो केंद्र सरकार की 'एनपीएस वात्सल्य योजना' एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। यह योजना बच्चों के लिए बनाई गई एक विशेष पेंशन स्कीम है, जिसमें माता-पिता या अभिभावक अपने नाबालिग बच्चों के नाम पर निवेश कर सकते हैं। इस योजना में लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार करने के साथ टैक्स बचत का भी फायदा मिलता है।

एनपीएस वात्सल्य योजना को सितंबर 2024 में नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत शुरू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देना है। यह योजना पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) द्वारा संचालित की जाती है। इसमें निवेश पर लगभग 9.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक रिटर्न मिलने की संभावना बताई जाती है।

इस योजना में माता-पिता या अभिभावक अपने 18 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर खाता खोल सकते हैं। बच्चा भारतीय नागरिक, एनआरआई या ओसीआई श्रेणी का हो सकता है। जब तक बच्चा बालिग नहीं होता, तब तक खाते का संचालन माता-पिता या अभिभावक करते हैं।

एनपीएस वात्सल्य योजना में सालाना न्यूनतम 1,000 रुपए निवेश करना जरूरी है। हालांकि अधिकतम निवेश की कोई सीमा तय नहीं की गई है। यानी माता-पिता अपनी क्षमता के अनुसार निवेश कर सकते हैं।

इस योजना का एक बड़ा फायदा टैक्स बचत भी है। आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीडी(1बी) के तहत माता-पिता या अभिभावक 1.5 लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा अतिरिक्त 50,000 रुपए की कटौती का फायदा भी मिलता है।

खाता खोलने के लिए बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, पासपोर्ट या पैन कार्ड जैसे दस्तावेज मान्य हैं। शुरुआत में बच्चे का बैंक खाता होना जरूरी नहीं है, लेकिन आंशिक निकासी या 18 वर्ष से पहले एग्जिट के समय बैंक खाता आवश्यक होगा।

एनपीएस वात्सल्य योजना में निवेश के लिए तीन विकल्प दिए गए हैं। पहला 'डिफॉल्ट चॉइस' है, जिसमें 50 प्रतिशत निवेश इक्विटी में किया जाता है। दूसरा 'ऑटो चॉइस' है, जिसमें निवेशक आक्रामक, मध्यम या सुरक्षित फंड विकल्प चुन सकते हैं।

तीसरा 'एक्टिव चॉइस' है, जिसमें माता-पिता खुद तय कर सकते हैं कि पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट डेट या अन्य एसेट्स में कितना लगाया जाए। इसमें इक्विटी में अधिकतम 75 प्रतिशत तक निवेश किया जा सकता है।

इस योजना में कुछ विशेष परिस्थितियों में आंशिक निकासी की सुविधा भी दी गई है। खाता खुलने के तीन साल बाद माता-पिता जमा राशि का 25 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं। यह सुविधा अधिकतम तीन बार ली जा सकती है।

निकासी का उपयोग बच्चे की शिक्षा, गंभीर बीमारी के इलाज या 75 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है।

जब बच्चा 18 साल का हो जाता है, तब उसके पास दो विकल्प होते हैं। पहला, वह खाते को बंद करके राशि निकाल सकता है। दूसरा, वह इसे सामान्य एनपीएस खाते में बदल सकता है। इसके लिए 18 साल पूरा होने के तीन महीने के भीतर केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

अगर बच्चे की मृत्यु हो जाती है, तो पूरी राशि नॉमिनी को दे दी जाती है। वहीं माता-पिता की मृत्यु की स्थिति में दूसरा अभिभावक नया केवाईसी कराकर योजना जारी रख सकता है। यदि दोनों अभिभावकों की मृत्यु हो जाए, तो कानूनी अभिभावक बच्चे के बालिग होने तक खाते को जारी रख सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कम उम्र से निवेश शुरू करने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है और लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। ऐसे में एनपीएस वात्सल्य योजना बच्चों की उच्च शिक्षा, करियर और भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए मजबूत वित्तीय सुरक्षा देने वाला विकल्प बन सकती है।

--आईएएनएस

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