नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। आजकल कम उम्र में ही बालों का सफेद होना आम समस्या बनती जा रही है। कई लोगों के बाल 20 से 30 साल की उम्र में ही सफेद होने लगते हैं। सफेद बालों को देखकर लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं और उन्हें छिपाने के लिए बार-बार हेयर कलर या डाई का इस्तेमाल करने लगते हैं। हालांकि, बालों का सफेद होना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता।
उम्र बढ़ने के साथ बालों में मेलेनिन का बनना कम होता है, जिससे बालों का रंग धीरे-धीरे सफेद होने लगता है। लेकिन अगर कम उम्र में बाल तेजी से सफेद हो रहे हैं, तो खान-पान, तनाव, नींद और शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी जैसी चीजों पर ध्यान देना जरूरी है।
बालों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। डाइट में प्रोटीन, आयरन, विटामिन बी12, फोलेट, जिंक और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों की कमी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए हरी सब्जियां, दालें, अंडे, दूध-दही, पनीर, फल, मेवे और बीज जैसी चीजों को खाने में शामिल किया जा सकता है।
आंवला भी बालों की देखभाल के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसमें विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड्स पाए जाते हैं, जो बालों को हेल्दी बनाने में मदद करते है।
नारियल तेल से सिर की हल्की मालिश करना भी बालों की देखभाल का आसान तरीका है। इससे बालों और स्कैल्प में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है और रूखे बालों की समस्या कम होती है।
तनाव को कम करना भी जरूरी है। लगातार तनाव शरीर पर कई तरह का असर डाल सकता है और कुछ मामलों में बालों की समस्याओं से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए रोजाना थोड़ा समय टलहना, एक्सरसाइज, योगा या मेडिटेशन के लिए निकालना मददगार हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है।
धूम्रपान से दूरी बनाना भी बालों की सेहत के लिए जरूरी है। कुछ रिसर्च में स्मोकिंग और समय से पहले बाल सफेद होने के बीच संबंध पाया गया है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति धुम्रपान करता है, तो इसे छोड़ना बालों के साथ-साथ पूरी सेहत के लिए बेहतर कदम है।
बालों को बार-बार बहुत ज्यादा हीट देना, बहुत टाइट हेयरस्टाइल बनाना या केमिकल प्रोडक्ट्स का लगातार इस्तेमाल करना भी बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए माइल्ड शैम्पू का इस्तेमाल करें, बालों को जरूरत के हिसाब से धोएं और बहुत ज्यादा हीट स्टाइलिंग से बचें।
अगर कम उम्र में अचानक बहुत तेजी से बाल सफेद होने लगें, तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। विटामिन बी12, आयरन या थायराइड जैसी समस्याओं की जांच की जरूरत कुछ लोगों में हो सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
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