आयुष और इंडियाएआई की साझेदारी, एआई की मदद से पारंपरिक चिकित्सा को मिलेगा नई तकनीक का सहारा

आयुष और इंडियाएआई की साझेदारी, एआई की मदद से पारंपरिक चिकित्सा को मिलेगा नई तकनीक का सहारा

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में बदलते समय के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि भारत के पुराने चिकित्सा ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए, ताकि शोध को बढ़ावा मिले और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई मिशन ने मिलकर काम करने का फैसला किया है।

केंद्रीय आयुष मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडियाएआई मिशन के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से आयुष क्षेत्र में नए शोध, डिजिटल सेवाओं और तकनीकी विकास को बढ़ावा देना है। इस पहल से आयुष क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में मदद मिलेगी और पारंपरिक चिकित्सा को नई पहचान मिल सकेगी।

इस समझौते पर आयुष मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी और चीफ विजिलेंस ऑफिसर डॉ. कविता जैन, इंडियाएआई मिशन के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और माइटी के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर आयुष मंत्रालय और इंडियाएआई के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

डॉ. कविता जैन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आयुष क्षेत्र से जोड़ने से शोध और नई रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा। एआई की मदद से आयुष चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े पुराने ज्ञान को बेहतर तरीके से समझा और सुरक्षित रखा जा सकेगा। इसके अलावा औषधीय पौधों, दवाओं के उपयोग, शोध कार्यों और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इंडियाएआई के साथ यह सहयोग आयुष क्षेत्र को ज्यादा आधुनिक और मजबूत बनाने में मदद करेगा। इससे शोधकर्ताओं को नई तकनीक का उपयोग करने का मौका मिलेगा और आयुष से जुड़ी जानकारियों को दुनिया के सामने बेहतर तरीके से रखा जा सकेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक तकनीक का साथ आना एक महत्वपूर्ण कदम है। इस साझेदारी के तहत एआईकोष प्लेटफॉर्म को आयुष क्षेत्र से जुड़े शोध और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी से जोड़ा जाएगा। इससे वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को एआई आधारित नए समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी।

इस योजना के तहत आयुष मंत्रालय एआईकोष प्लेटफॉर्म पर अपनी योग्य शोध सामग्री साझा करेगा। इसमें स्वास्थ्य से जुड़े डेटा, एआई मॉडल, तकनीकी उपकरण और अलग-अलग उपयोग के उदाहरण शामिल होंगे। इससे आयुष क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को एक ऐसा मंच मिलेगा, जहां वे नई तकनीक के साथ मिलकर काम कर सकेंगे।

आयुष ग्रिड के इमर्जिंग टेक्नोलॉजी कार्यक्रम के तहत भी एआई आधारित प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। आयुष ग्रिड के अधिकारी नमन गोयल ने कहा कि यह समझौता आयुष क्षेत्र में डिजिटल बदलाव लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं और शोध कार्यों में एआई के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।

इस साझेदारी के तहत इंडियाएआई पहल के माध्यम से हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और जीपीयू जैसी आधुनिक कंप्यूटर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इन सुविधाओं की मदद से बड़े स्तर पर एआई आधारित शोध और स्वास्थ्य संबंधी तकनीक विकसित की जा सकेगी।

एआई की मदद से भविष्य में औषधीय पौधों की पहचान, दवाओं के असर का अध्ययन, शोध में तेजी और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है। इससे आयुष चिकित्सा को और अधिक वैज्ञानिक तरीके से समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

--आईएएनएस

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