नई दिल्ली, 12 मई (आईएएनएस)। बच्चे का जन्म परिवार में खुशी लाता है, लेकिन हर महिला के लिए माता-पिता बनना आसान नहीं होता। कई महिलाओं को प्रसव के बाद भावनाओं में उतार-चढ़ाव, उदासी और चिंता का सामना करना पड़ता है। यह ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन’ यानी प्रसवोत्तर अवसाद भी हो सकता है, जिसे समझना और समय पर समाधान करना बेहद जरूरी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ‘पोस्टपार्टम डिप्रेशन’ के बारे में विस्तार से जानकारी देता है। इस विषय में मैटरनल-फीटल मेडिसिन की सब-स्पेशलिस्ट और नॉर्थ कैरोलिना स्कूल ऑफ मेडिसिन की प्रोफेसर डॉ. एलिसन स्ट्यूबे बताती हैं कि एक आजाद इंसान से अचानक माता-पिता बन जाना कोई पलक झपकते वाली बात नहीं है। बच्चे के जन्म के बाद प्यार, खुशी, उत्साह के साथ-साथ निराशा और घबराहट भी महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन जब ये नकारात्मक भावनाएं लंबे समय तक बनी रहें और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है।
पोस्टपार्टम डिप्रेशन बच्चे के जन्म के दो से आठ हफ्तों बाद शुरू हो सकता है, लेकिन कभी-कभी एक साल तक भी रह सकता है। डॉ. स्ट्यूबे के अनुसार, इसमें सिर्फ उदासी ही नहीं, बल्कि बहुत ज्यादा घबराहट भी शामिल होती है। यह मां के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और बच्चे की देखभाल में भी बाधा डाल सकता है।
अगर पोस्टपार्टम डिप्रेशन के मुख्य लक्षणों के बारे में बात करें तो इसमें लगातार उदासी या खालीपन महसूस करना, रोने की इच्छा बार-बार होना, बच्चे से भावनात्मक जुड़ाव न बन पाना, खुद और बच्चे की देखभाल करने की क्षमता पर शक होना, नींद न आना (भले ही बच्चा सो रहा हो), थकान, ऊर्जा की कमी और ध्यान केंद्रित न कर पाना, खाने की आदतों में बदलाव के साथ ही बच्चे या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आना है। ये विचार डरावने होते हैं लेकिन मदद मांगने पर नियंत्रित किए जा सकते हैं।
डॉ. स्ट्यूबे कहती हैं, “परेशान होना सामान्य है, लेकिन जब यह परेशानी इतनी बढ़ जाए कि आप अपने बच्चे के साथ खुश रहने और जिंदगी जीने में असमर्थ महसूस करें तो समझ लें कि मदद की जरूरत है।”
ऐसे में एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे कैसे पार पाएं? इसके लिए सबसे पहले सपोर्ट सिस्टम बनाएं- परिवार, पति, दोस्तों और अनुभवी लोगों से बात करें। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी लें साइको एजुकेशन के जरिए तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच को अपनाएं। डॉक्टर, मनोचिकित्सक या काउंसलर से संपर्क करें। जरूरत पड़ने पर दवा भी ली जा सकती है। इसके साथ ही आराम और सेहत का ख्याल रखें- पौष्टिक भोजन, व्यायाम और छोटी-छोटी नींद लें। समय पर मदद मांगें लक्षण दिखते ही चुप न रहें। जितनी जल्दी मदद ली जाएगी, उतनी जल्दी ठीक होने की संभावना बढ़ेगी।
एक्सपर्ट के अनुसार, पोस्टपार्टम डिप्रेशन कोई कमजोरी नहीं है। यह एक मानसिक स्थिति है, जिसका सफल इलाज संभव है। अगर आप या आपके परिवार में कोई इस समस्या से गुजर रहा है तो यूनाइटेड फॉर ग्लोबल मेंटल हेल्थ या स्थानीय हेल्पलाइन से संपर्क कर सकता है।
--आईएएनएस
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