गुवाहाटी, 4 मई (आईएएनएस)। असम की सिबसागर विधानसभा सीट से रायजोर दल के अखिल गोगोई ने भाजपा के उम्मीदवार कुशल दोवारी को 17272 वोटों से हराया है।
असम की सिबसागर विधानसभा सीट जहां एक ओर लंबे समय तक वामपंथी और कांग्रेस राजनीति का केंद्र रही, वहीं दूसरी ओर हाल के वर्षों में उभरती क्षेत्रीय ताकतों और राष्ट्रीय दलों के बीच सीधी टक्कर का मंच बन गई है। सिबसागर, जो जोरहाट लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है, आज असम की बदलती राजनीतिक दिशा का प्रतीक बन चुका है।
1951 में स्थापित इस सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र ने अब तक राज्य के सभी 16 चुनावों में भाग लिया है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और वामपंथी दलों का दबदबा रहा है। कांग्रेस ने यहां आठ बार जीत हासिल की, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने पांच बार इस सीट पर कब्जा जमाया।
इसके अलावा एक-एक बार निर्दलीय और रायजोर दल ने जीत दर्ज की है। लेकिन इस सीट की सबसे बड़ी राजनीतिक खासियत यह है कि भारतीय जनता पार्टी अब तक यहां अपना खाता तक नहीं खोल पाई है। यह स्थिति तब और दिलचस्प हो जाती है जब लोकसभा चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन इस क्षेत्र में लगातार बेहतर रहा है। यानी मतदाता राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक रुझान दिखाते हैं।
2021 का विधानसभा चुनाव सिबसागर की राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस चुनाव में अखिल गोगोई, जो किसान आंदोलन और सामाजिक मुद्दों से जुड़े एक प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने भाजपा की उम्मीदवार सुरभि राजकोंवर को 11,875 वोटों से हराया। गोगोई को 57,219 वोट मिले, जबकि भाजपा को 45,344 वोट प्राप्त हुए। यह जीत केवल एक चुनावी परिणाम नहीं थी, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति के उभार का संकेत भी थी।
इससे पहले 2016 के चुनाव में कांग्रेस के प्रणब कुमार गोगोई ने बेहद करीबी मुकाबले में भाजपा को हराया था। उस चुनाव में जीत का अंतर मात्र 542 वोटों का था, जो दर्शाता है कि भाजपा धीरे-धीरे इस क्षेत्र में अपनी जमीन बना रही थी। इसके बावजूद वह जीत हासिल नहीं कर सकी। मतदाता आंकड़ों पर नजर डालें तो सिबसागर में राजनीतिक भागीदारी हमेशा उच्च रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां 77.98 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2016 के विधानसभा चुनाव में यह आंकड़ा 81.92 प्रतिशत तक पहुंच गया था। 2021 में भी लगभग 82 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इस क्षेत्र की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।
2026 के चुनाव के लिए सिबसागर में कुल 2,09,976 मतदाता पंजीकृत हैं, जो 2024 की तुलना में 2,371 अधिक हैं। दिलचस्प बात यह है कि 2024 से पहले हुए पुनरीक्षण में यहां मतदाताओं की संख्या में 58 हजार से अधिक की वृद्धि हुई थी, जो राज्य में सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक थी। यह बदलाव आने वाले चुनावों के परिणामों पर निर्णायक असर डाल सकता है।
सामाजिक समीकरण की बात करें तो सिबसागर एक संतुलित निर्वाचन क्षेत्र है। यहां लगभग 17 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं, जो सबसे बड़ा समूह बनाते हैं। इसके अलावा अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी करीब 10.27 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों की लगभग 5.60 प्रतिशत है। यह विविध सामाजिक संरचना चुनावी रणनीतियों को जटिल बनाती है, जहां हर वर्ग को साधना जरूरी हो जाता है।
--आईएएनएस
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