कुपवाड़ा, 2 अगस्त (आईएएनएस)। कश्मीरी पंडितों की अपनी मातृभूमि में वापसी को घाटी में बदलते समय के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद कई विस्थापित परिवारों ने घाटी में फिर से कदम रखा है। समुदाय के लोगों का कहना है कि अब हालात पहले जैसे नहीं हैं और भविष्य को लेकर उम्मीद बढ़ी है।
एक कश्मीरी पंडित, जिनका परिवार 1990 के पलायन के दौरान कश्मीर छोड़कर दशकों तक जम्मू में रहा, ने आईएएनएस से कहा, "हम 1990 के दशक में यहां से चले गए थे और जम्मू में बस गए थे लेकिन वहां रहते हुए भी हमारा दिल हमेशा कश्मीर में अपने घर के साथ ही जुड़ा रहा। आर्टिकल-370 हटने के बाद हमें वापस आने का मौका मिला। हालात अब पहले जैसे नहीं रहे और मुझे लगता है कि नई सरकार के आने से काफी सकारात्मक बदलाव आया है। हम जो बदलाव देख रहे हैं, उनसे खुश हैं। आज हालात पहले जैसे नहीं हैं और हमें लगता है कि अब उम्मीद की किरण नजर आ रही है।"
स्थानीय निवासी इंजीनियर शाहिद उल इस्लाम वानी ने कश्मीरी पंडितों की वापसी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग न सिर्फ कुपवाड़ा लौटे हैं बल्कि यहां टीचर, इंजीनियर और क्लर्क के तौर पर काम भी कर रहे हैं। इस साल बड़ी संख्या में लोग अपने मंदिरों में दर्शन के लिए आए। हम चाहते हैं कि और भी लोग लौटें। जब हम उन्हें सरकारी दफ़्तरों में देखते हैं, तो हमें खुशी होती है। हमने वह दौर खुद तो नहीं देखा लेकिन अपने बुज़ुर्गों से यहां कभी रहे भाईचारे के माहौल के बारे में सुना है और हम सच में उसे बहुत याद करते हैं।"
डॉ. फिदा हुसैन ने कहा कि ऐसी वापसी से सामाजिक सद्भाव मजबूत होता है। उन्होंने हंदवाड़ा में एक कश्मीरी पंडित परिवार द्वारा बिजनेस आउटलेट खोलने का उदाहरण दिया और इसे बढ़ते भरोसे और सामान्य स्थिति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, "यह आपका घर है, आपकी जड़ें हैं, आपकी विरासत है। आपकी हर चीज यहीं है। हम सभी कश्मीरी पंडितों से गुजारिश करते हैं कि वे वापस आएं और कश्मीर के भविष्य का हिस्सा बनें।"
कुपवाड़ा के कई निवासियों का मानना है कि विस्थापित परिवारों की वापसी अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में आए बदलाव को दिखाती है। स्थानीय लोग अब कश्मीरी पंडितों को अलग-अलग सेक्टर और सरकारी विभागों में काम करते देख रहे हैं, जिससे सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी बढ़ी है।
--आईएएनएस
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