अहमदाबाद, 13 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात की ऐतिहासिक 149वीं भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले अहमदाबाद में सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। मुस्लिम समुदाय की ओर से परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी भगवान जगन्नाथ को 'एकता रथ' समर्पित किया गया। इस रथ को औपचारिक रूप से जगन्नाथ मंदिर के महंत को सौंपा गया। रथ यात्रा से पहले आयोजित इस कार्यक्रम में हिंदू-मुस्लिम एकता, राष्ट्रीय एकजुटता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।
इस वर्ष मुस्लिम नेता रऊफ बंगाली द्वारा तैयार कराया गया यह विशेष रथ कई मायनों में खास है। पहली बार चांदी से बने रथ पर सोने की पत्ती चढ़ाई गई है। करीब 300 ग्राम से अधिक चांदी से तैयार इस आकर्षक रथ को बनाने में लगभग 15 दिन का समय लगा। तीन घोड़ों के साथ सुसज्जित इस रथ को 16 जुलाई को निकलने वाली 149वीं जगन्नाथ रथ यात्रा का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है।
रऊफ बंगाली ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि वह पिछले 26 वर्षों से मुस्लिम समाज की ओर से भगवान जगन्नाथ को चांदी का रथ भेंट कर रहे हैं और इस वर्ष उनका यह 27वां रथ है। वर्ष 2000 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद उन्होंने हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के उद्देश्य से इस परंपरा की शुरुआत की थी। पिछले ढाई दशक में यह पहल केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं रही, बल्कि समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक बन गई है। उन्होंने खुशी जताई कि आज गुजरात में अमन और शांति का माहौल है और सभी समुदायों के लोग इस संदेश के साथ जुड़ रहे हैं। उनकी कामना है कि भगवान जगन्नाथ की लगभग 15 से 16 किलोमीटर लंबी रथ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हो।
जगन्नाथ मंदिर ट्रस्टी महेंद्र झा ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथ यात्रा 16 जुलाई को सुबह 7 बजे मंदिर परिसर से प्रारंभ होगी। यात्रा की शुरुआत सबसे आगे चलने वाले 18 गजराजों (हाथियों) से होगी। इसके बाद 101 ट्रकों पर भारतीय संस्कृति की भव्य झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी। झांकियों के बाद भगवान जगन्नाथ को प्रसन्न करने के लिए लगभग 30 अखाड़ा मंडलियां विभिन्न प्रकार के व्यायाम और पारंपरिक करतबों का प्रदर्शन करेंगी। इसके साथ ही तीन रास-गरबा मंडलियां, तीन बैंड दल और फिर भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ, सुभद्रा का देवदलन रथ और बलभद्र का तालध्वज रथ यात्रा के हिस्सा होंगे। यात्रा के सबसे पीछे मंदिर के महंत साधु-संतों के साथ शामिल होंगे, जो वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है।
महेंद्र झा ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में देशभर से साधु-संत हर वर्ष अहमदाबाद पहुंचते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। अमावस्या के दिन जब भगवान मामा के घर से वापस मंदिर लौटते हैं, तब नेत्रोत्सव पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी साधु-संतों का सम्मान किया जाता है और विशाल भंडारे का आयोजन होता है। रथ यात्रा के अगले दिन भगवान जगन्नाथ का स्वर्ण वेश में विशेष श्रृंगार किया जाता है। वहीं, रथ यात्रा में भाग लेने वाले गजराजों को मंदिर परिसर में विशेष रूप से आमंत्रित कर पूजा-अर्चना की जाती है। उन्हें भगवान गणपति का स्वरूप मानते हुए रथ यात्रा के मंगलमय संचालन की प्रार्थना की जाती है।
महेंद्र झा ने बताया कि रथ यात्रा वाले दिन सुबह 4 बजे होने वाली मंगला आरती में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इसके बाद सुबह 4:30 बजे भगवान की आंखों पर बंधी पट्टी खोली जाएगी और सुबह 5:45 बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथों में विराजमान किया जाएगा। सुबह 7 बजे शुभ मुहूर्त में गुजरात के मुख्यमंत्री परंपरागत विधि संपन्न करेंगे। इस रस्म के तहत मुख्यमंत्री सोने के झाड़ू से भगवान के रथ के आगे का मार्ग साफ करते हैं और स्वयं रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ कराते हैं।
जगन्नाथ मंदिर के महंत दिलीप दास महाराज ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथ यात्रा पूरे प्रदेश का आस्था और श्रद्धा का महापर्व है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (दूज) के दिन 16 जुलाई को सुबह 7 बजे मुख्यमंत्री द्वारा परंपरागत विधि के बाद यात्रा शुरू होगी। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस बार भी गजराज, सांस्कृतिक झांकियां, अखाड़े, भजन मंडलियां, भगवान के रथ, ध्वज और पताकाओं के साथ भव्य शोभायात्रा निकलेगी।
--आईएएनएस
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