देहरादून, 4 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की ओर से अग्निवीरों की सेवा अवधि चार साल से बढ़ाकर छह साल करने के फैसले का रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल ने स्वागत किया। उन्होंने इस निर्णय को देश की सुरक्षा, सेना की कार्यक्षमता और अग्निवीरों के आर्थिक भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में प्रशिक्षित सैन्यकर्मियों को दो साल अतिरिक्त सेना में बनाए रखना जरूरी है। इससे न केवल सेना को अनुभवी जवानों की सेवाएं मिलेंगी, बल्कि अग्निवीरों को भी आर्थिक रूप से मजबूत होने का अवसर मिलेगा।
रिटायर्ड मेजर जनरल शम्मी सभरवाल ने कहा कि सरकार का अग्निवीरों का कार्यकाल चार से बढ़ाकर छह साल करने का निर्णय बहुत अच्छा है। वह इस फैसले को दो नजरियों से देखते हैं: पहला, देश और सेना की सुरक्षा और दूसरा, अग्निवीरों का व्यक्तिगत और आर्थिक भविष्य। मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं हैं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में कभी भी कुछ भी हो सकता है। इस परिस्थिति में चार साल तक सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों को सेना से बाहर भेजना उचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि देश सबसे पहले है और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेना में रखने से इस महत्वपूर्ण समय में देश और सेना को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों की वर्तमान उम्र लगभग 21 से 22 साल है। दो साल अतिरिक्त सेवा के बाद भी उनकी उम्र करीब 24 से 25 साल ही होगी। इस उम्र में उनका अनुभव और प्रशिक्षण किसी भी यूनिट की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
शम्मी सभरवाल ने कहा कि इस फैसले का दूसरा बड़ा लाभ अग्निवीरों को आर्थिक रूप से मिलेगा। उन्होंने बताया कि पिछले तीन-चार साल में कई पैनल चर्चाओं के दौरान अग्निवीरों की चार साल की सेवा पूरी होने के बाद उनके भविष्य को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब दो साल का अतिरिक्त समय मिलने से उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पहले 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सेना में रखने का प्रावधान था, जबकि बाकी 75 प्रतिशत के सामने चार साल बाद सेवा छोड़ने की स्थिति आती थी। अब इन 75 प्रतिशत को भी दो साल अतिरिक्त सेवा का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा कि चार साल की सेवा के बाद बचत और सरकार से मिलने वाली राशि को मिलाकर एक अग्निवीर के पास लगभग 20 से 22 लाख रुपए हो सकते हैं। यदि कोई जवान हर महीने पांच हजार रुपए घर भेजता है और पांच हजार रुपए अपने ऊपर खर्च करता है, तो बाकी राशि बचा सकता है। सेना में रहने के दौरान भोजन, रहने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था होने से खर्च सीमित रह सकता है। दो साल अतिरिक्त सेवा के बाद एक समझदार और बचत करने वाला अग्निवीर करीब 30 से 32 लाख रुपए लेकर सेना से बाहर आ सकता है।
रिटायर्ड मेजर जनरल ने कहा कि इस फैसले से भविष्य में अग्निवीर बनने की तैयारी कर रहे युवाओं का हौसला भी बढ़ेगा। अब उन्हें पता होगा कि कम से कम छह साल तक सेना में सेवा करने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने अपने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआती दौर में कुछ युवा दो महीने के भीतर ही सेवा छोड़ने के बारे में सोचने लगते थे। कई जवानों को दो-तीन साल बाद लगता था कि वे सेना में आगे सेवा नहीं कर पाएंगे। हालांकि, समय के साथ वे सैन्य जीवन के अभ्यस्त हो जाते हैं और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। छह साल की अवधि मिलने से युवाओं को अपनी रुचि और भविष्य के बारे में फैसला करने के लिए अधिक समय मिलेगा। जो आगे सेना में सेवा नहीं करना चाहते, वे सम्मान के साथ बाहर जाकर अपना भविष्य बना सकते हैं। वहीं, सेना में बने रहने की इच्छा रखने वालों के लिए नियमित सेवा में शामिल होने का अवसर भी रहेगा।
शम्मी सभरवाल ने कहा कि छह साल बाद आर्थिक रूप से मजबूत होकर निकलने वाले युवा अपना कारोबार या उद्यम शुरू कर सकते हैं। सेना में मिले प्रशिक्षण और अनुशासन का लाभ उन्हें आगे के जीवन में भी मिलेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पौड़ी गढ़वाल जैसे क्षेत्र से आने वाला कोई युवा अपने घर के आसपास पोल्ट्री फार्म या कृषि से जुड़ा कारोबार शुरू कर सकता है और दूसरे लोगों को भी रोजगार दे सकता है। यदि किसी युवा के पास 30 लाख रुपए के आसपास की आर्थिक क्षमता है और सेना का अनुभव भी है, तो वह अपना उद्यम खड़ा कर सकता है। सरकार की योजनाओं और सॉफ्ट लोन जैसी सुविधाओं के माध्यम से भी युवाओं को कारोबार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि अग्निवीरों की सेवा अवधि बढ़ाने का फैसला देश की सुरक्षा, सेना और युवाओं के व्यक्तिगत भविष्य, तीनों के लिहाज से लाभकारी है। प्रशिक्षित जवानों को अतिरिक्त समय तक सेना में बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना इस फैसले की बड़ी विशेषता है।
--आईएएनएस
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