मुंबई, 30 मार्च (आईएएनएस)। अभिनेता, डायरेक्टर और राइटर अदिवि शेष अपनी अपकमिंग फिल्म ‘डकैत’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया जिसे ‘दखल देने वाला विचार’ मानती है, वह दरअसल दिमाग की स्वाभाविक और सच्ची प्रतिक्रिया है।
अदिवि शेष का बयान पारंपरिक सोच से काफी अलग है। आमतौर पर दखल देने वाले विचारों को अवांछित, परेशान करने वाला और शर्मिंदगी पैदा करने वाला माना जाता है, लेकिन अदिवि इन्हें दिमाग की ईमानदार प्रतिक्रिया मानते हैं।
आईएएनएस से खास बातचीत में अदिवि शेष ने कहा, “मुझे लगता है कि हम खुद को दूसरों के जजमेंट से बचाने के लिए तरह-तरह के कवच पहन लेते हैं। सच तो यह है कि जिसे हम दखल देने वाला विचार समझते हैं, वह असल में एक सच्चा विचार होता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम ऐसी दुनिया में रहते हैं, जहां हम अपनी ये सच्ची बातें खुलकर नहीं कह सकते। मैं उन लोगों जितना बहादुर नहीं हूं, जो बिना डरे सच बोल देते हैं।”
फिल्म में अदिवि शेष की भूमिका को लेकर काफी चर्चा है। अदिवि शेष न सिर्फ एक सफल अभिनेता हैं बल्कि एक विचारक और रचनाकार भी हैं।
अपनी फिल्म ‘डकैत’ की बात करते हुए अदिवि शेष ने तेलुगु सिनेमा की ताकत पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तेलुगु सिनेमा भारत की अन्य फिल्म इंडस्ट्रीज से अलग इसलिए है क्योंकि यहां अभी भी कॉर्पोरेट का दबदबा नहीं है। यहां फिल्में व्यक्तिगत प्रोड्यूसर्स बनाते हैं। कोई घर गिरवी रखकर, कोई जमीन बेचकर और कोई अपनी कमाई से फिल्म बनाता है।
अदिवि शेष ने कहा, “तेलुगू सिनेमा में अभी भी भावनात्मक जुड़ाव है। लोग अपना सब कुछ दांव पर लगाकर फिल्म बनाते हैं। यही वजह है कि यहां की फिल्मों में जान होती है।”
सुप्रिया यारलागड्डा निर्मित फिल्म ‘डकैत’ 10 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
--आईएएनएस
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