नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। गर्मियों में बाहर तेज धूप से परेशान लोग जैसे ही घर पहुंचते हैं, सबसे पहले एयर कंडीशनर चालू करते हैं। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि एसी ऑन करने के बाद भी कमरा तुरंत ठंडा नहीं होता। कई बार लोग समझते हैं कि शायद एसी खराब हो गया है या उसकी कूलिंग कम हो चुकी है, जबकि इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण होते हैं। दरअसल, कमरे के अंदर जमा गर्म हवा, दीवारों की गर्मी, बंद वातावरण और खराब एयर फ्लो जैसी चीजें एसी की कूलिंग को धीमा कर देती हैं। अगर एसी का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और कमरे की कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखा जाए, तो कूलिंग बेहतर हो सकती है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, कमरे का तापमान दीवारों, फर्श, फर्नीचर और छत में जमा गर्मी से तय होता है। जब पूरा दिन धूप पड़ती है, तो कमरे की चीजें गर्मी को अपने अंदर जमा कर लेती हैं। ऐसे में जैसे ही एसी चालू किया जाता है, उसे सिर्फ हवा ही नहीं बल्कि इन सभी गर्म सतहों को भी ठंडा करना पड़ता है। यही वजह है कि शुरुआत में एसी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और ठंडक आने में समय लगता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि एसी चालू करने से पहले अगर कुछ मिनटों के लिए सीलिंग फैन चला दिया जाए और कमरे की खिड़कियां या दरवाजे थोड़ी देर खोल दिए जाएं, तो इसका सीधा फायदा मिलता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे एयर सर्कुलेशन कहा जाता है। जब पंखा चलता है तो कमरे में फंसी गर्म हवा तेजी से इधर-उधर घूमती है और बाहर निकलने लगती है। इससे कमरे के अंदर का तापमान थोड़ा कम हो जाता है। ताजी हवा आने से गर्म और ठंडी हवा का संतुलन बनता है, जिसके बाद एसी को कम मेहनत करनी पड़ती है और वह तेजी से कूलिंग देने लगता है।
एयर फिल्टर की सफाई भी एसी की परफॉर्मेंस में बड़ी भूमिका निभाती है। एसी के अंदर लगा फिल्टर हवा में मौजूद धूल और छोटे कणों को रोकने का काम करता है। लेकिन लगातार इस्तेमाल के कारण इसमें धूल जमने लगती है। जब फिल्टर गंदा हो जाता है, तो हवा का रास्ता संकरा हो जाता है और ठंडी हवा कमरे तक सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती। इसलिए हर दो हफ्ते में फिल्टर साफ करना जरूरी होता है, ताकि एयर फ्लो बेहतर हो सके।
एसी की आउटडोर यूनिट को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह यूनिट कमरे की गर्मी को बाहर निकालने का काम करती है। अगर इसके आसपास धूल, पत्तियां या कचरा जमा हो जाए तो गर्म हवा बाहर निकलने में दिक्कत होती है। इससे एसी का कंप्रेसर ज्यादा दबाव में काम करता है और बिजली की खपत भी बढ़ जाती है। साथ ही समय-समय पर गैस लेवल की जांच भी जरूरी होती है, क्योंकि गैस कम होने पर एसी पर्याप्त ठंडक नहीं दे पाता।
कमरे की सेटिंग भी कूलिंग पर सीधा असर डालती है। कई लोग बहुत जल्दी ठंडक पाने के लिए एसी को 16 या 18 डिग्री पर चला देते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास का तापमान सबसे संतुलित माना जाता है। इस तापमान पर एसी कम बिजली खर्च करता है और शरीर को भी आरामदायक ठंडक मिलती है।
--आईएएनएस
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