भारतीय शेयर बाजार बड़ी तेजी के साथ बंद; सेंसेक्स 1,533.72 अंक बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार बड़ी तेजी के साथ बंद; सेंसेक्स 1,533.72 अंक बढ़ा

मुंबई, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,533.72 अंक या 2.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,315.61 और निफ्टी 374.65 अंक या 1.66 प्रतिशत की मजबूती के साथ 22,997.35 पर था।

सत्र के दौरान बाजार की तेजी को सहारा निजी बैंक और आईटी शेयरों ने दिया। सूचकांकों में निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.89 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.83 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 1.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी ऑयलएंडगैस, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मेटल हरे निशान में थे।

हालांकि, सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लूजर्स थे।

सूचकांकों में टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, इटरनल, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, एक्सिस बैंक, इंडिगो, आईटीसी, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस और अल्ट्राटेक सीमेंट गेनर्स थे। केवल बीईएल, ट्रेंट और एचयूएल ही लूजर्स थे।

लार्जकैप के उलट मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 211.85 अंक या 0.36 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,197.25 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 253.10 अंक या 1.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,131.70 पर था।

जानकारों ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों में तेजी की वजह एआई के अत्यधिक मूल्यांकन और अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति को लेकर चिंताओं के चलते टेक्नोलॉजी स्टॉक्स केंद्रित वैश्विक बाजारों में बिकवाली थी, जिससे घरेलू बाजार का आकर्षण बढ़ा।

वहीं, बॉन्ड यील्ड में सुधार, रुपए की स्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी बाजार के सेंटिमेंट को समर्थन दिया, जबकि इक्विटी टैक्स पर सरकार के पुनर्विचार की संभावना ने सकारात्मक माहौल तैयार करने में मदद की है।

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, छोटे और मध्यम आकार के शेयरों में कमजोरी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बिकवाली से संकेत मिलता है कि इस उछाल में व्यापक भागीदारी की कमी है। इस कारण निकट भविष्य में स्थिरता दूसरी तिमाही के राजस्व और मार्जिन में अपेक्षित प्रदर्शन, व्यापक बाजार भागीदारी और विदेशी निवेश की वापसी पर निर्भर करेगी, जबकि भू-राजनीतिक और वैश्विक मुद्रास्फीति के जोखिमों के बीच तेल और मुद्रा में टिकाऊ स्थिरता महत्वपूर्ण बनी हुई है।

--आईएएनएस

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