ओरंगुटान के बच्चे 'रॉकी' की वतन वापसी, भारत ने इंडोनेशिया भेजा

Baby Orangutan Rescued in India Repatriated to Indonesia

जकार्ता/नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। नवंबर 2024 में बचाए गए सुमात्रा मूल के ओरंगुटान के बच्चे को भारत ने सोमवार को इंडोनेशिया वापस भेज दिया। भारत और इंडोनेशिया की वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों तथा सीआईटीईएस प्रबंधन प्राधिकरणों के समन्वित प्रयासों से यह वापसी संभव हुई।

इंडोनेशिया स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। इसके अनुसार, ओरंगुटान को गुजरात से इंडोनेशिया भेजा गया। वह सोमवार को मेदान के कुआलानामु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा। इस अवसर पर मेदान स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास के अधिकारियों ने इंडोनेशिया के वन मंत्रालय की ओर से आयोजित स्वागत समारोह में हिस्सा लिया।

भारत में बचाए जाने के बाद से ओरंगुटान के बच्चे को भारतीय वन्यजीव अधिकारियों की देखरेख में रखा गया था। उसे जरूरी पशु चिकित्सा देखभाल और उपयुक्त आवास सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। उसकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के सीआईटीईएस प्रबंधन प्राधिकरणों ने आवश्यक नियमों और प्रोटोकॉल के तहत करीबी समन्वय बनाए रखा।

इस प्रक्रिया में एक विशेष कदम उठाते हुए भारत सरकार ने ओरंगुटान की वापसी से पहले उसकी देखभाल और रखरखाव पर हुए सभी पिछले खर्चों को भी माफ कर दिया।

यह वापसी भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और लुप्तप्राय वन्यजीव प्रजातियों की सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच भविष्य में सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इस बीच, सितंबर 2026 में ओडिशा में बचाए गए पांच युवा ओरंगुटानों को भी जल्द इंडोनेशिया वापस भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, उनकी प्रजाति और मूल स्थान की पुष्टि के साथ ही वापसी से जुड़ी सभी जरूरी प्रक्रियाओं और नियमों को पूरा करना होगा।

फिलहाल ये पांचों ओरंगुटान भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में देखरेख और सुरक्षा में हैं। उन्हें वहां आवश्यक पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस संबंध में जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास इंडोनेशिया के वन मंत्रालय के वन्यजीव विशेषज्ञों की नवंबर 2026 में भारत यात्रा की व्यवस्था करने में भी सहयोग कर रहा है। इस यात्रा का उद्देश्य ओरंगुटानों की पहचान और उनकी वापसी से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में मदद करना है।

--आईएएनएस

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