ताइपे, 2 अगस्त (आईएएनएस)। 17 वर्षीय भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। वह इस खिताब को जीतने वाली किसी भी कैटेगरी की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी हैं। यह उनका पहला बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 300 टाइटल भी है।
तन्वी ने रविवार को महिला सिंगल्स फाइनल में वियतनाम की छठी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी गुयेन थुई लिन्ह को 21-16, 21-16 से हराकर शानदार जीत हासिल की। वह साइना नेहवाल (2008) के बाद ताइपे ओपन जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला सिंगल्स खिलाड़ी बन गई हैं।जीत के साथ ही इस टूर्नामेंट में भारत का 17 साल का खिताबी सूखा खत्म हो गया है। 2009 में टूर्नामेंट के ग्रां प्री गोल्ड दौर में ज्वाला गुट्टा और वी. दिजू की मिक्स्ड डबल्स जोड़ी की जीत के बाद यह देश की कुल तीसरी जीत है।
शुरुआती गेम में तन्वी ने तेजी से अपना दबदबा बनाया और 10-2 की बढ़त हासिल कर ली, हालांकि गुयेन ने अंतर को कम करके 10-8 कर दिया, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने जबरदस्त खेल दिखाते हुए आसानी से पहला गेम 21-16 से जीत लिया।
दूसरे गेम की शुरुआत में तन्वी 0-3 से पीछे थीं, लेकिन उन्होंने जल्द ही वापसी करते हुए बढ़त बना ली और अपनी बढ़त को सात अंकों तक पहुंचाया। आक्रामक रणनीति अपनाते हुए उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को कभी भी धीमा नहीं पड़ने दिया और बेहतरीन क्रॉस-कोर्ट शॉट्स और सटीक प्लेसमेंट का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपना मोमेंटम बनाए रखा और गेम 21-16 से जीत लिया। उन्होंने शानदार क्रॉस-कोर्ट ड्रॉप शॉट के साथ आखिरी प्वाइंट हासिल किया और सिर्फ 36 मिनट में फाइनल मुकाबला अपने नाम कर लिया।
इस जीत के साथ वह सुपर 300 या उससे ऊंचे स्तर का खिताब जीतने वाली चौथी भारतीय महिला सिंगल्स शटलर बन गई हैं और साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और देविका सिहाग के साथ एक खास क्लब में शामिल हो गईं। अपने शानदार प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए तन्वी ने कहा, "यह खिताब जीतकर मैं बहुत खुश हूं। मैंने हर कदम और हर मैच पर ध्यान देते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की और मुझे लगा कि पूरे टूर्नामेंट में मैंने बहुत अच्छा खेला। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन मैंने खुद से कहा कि अपना 100 प्रतिशत दूं और अपने खेल पर ध्यान बनाए रखूं।"
तन्वी के युवा करियर का यह केवल दूसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल मुकाबला था। इससे पहले, यूएस ओपन में बेइवेन झांग से हारकर वह उपविजेता रही थीं। 17 साल और 222 दिन की उम्र में, वह टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे कम उम्र की फाइनलिस्ट भी बनीं। उन्होंने कोरियाई डबल्स दिग्गज ली योंग डे का रिकॉर्ड तोड़ा, जो 2006 में पुरुषों के डबल्स खिताबी मुकाबले में पहुंचने के समय 17 साल और 287 दिन के थे।
--आईएएनएस
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