12 जुलाई का पंचांग: शिव और लक्ष्मी की पूजा करना उत्तम, दोपहर 12:05 से 12:59 बजे तक अभिजित मुहूर्त

12 जुलाई का पंचांग: शिव और लक्ष्मी की पूजा करना उत्तम, दोपहर 12:05 से दोपहर 12:59 बजे तक अभिजित मुहूर्त

नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है; यह सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है।

12 जुलाई 2026 (रविवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10:30 बजे तक है; इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत या वाहन या संपत्ति खरीदने के लिए बहुत उत्तम माना जाता है।

इस दिन सुबह 5:53 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 3:05 बजे चन्द्रोदय और शाम 5:26 बजे चन्द्रास्त होगा।

पंचांग के अनुसार, 12 जुलाई 2026 को सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित रहेगा। जबकि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में (सुबह लगभग 08:28 बजे तक) तक स्थित रहेगा। इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

वहीं, 12 जुलाई 2026 (रविवार) को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा। इस दिन वृद्धि योग (रात 20:05 बजे तक) रहेगा। इसके बाद व्यतिपात योग में रहेगा। रविवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 से दोपहर 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है।

वहीं, राहुकाल शाम 5:39 बजे से शाम 7:23 बजे तक रहेगा, गुलिक काल दोपहर 3:55 से शाम 5:39 बजे तक रहेगा। यमगंड काल दोपहर 12:26 बजे से 2:10 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है।

वहीं, 12 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि में गोचर करेंगे, जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेगा। 12 जुलाई 2026 (रविवार) को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना आवश्यक भी है, तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए।

--आईएएनएस

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