तेजस मार्क-1ए एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में देरी, इसी महीने रिव्यू मीटिंग प्रस्तावित; रक्षा मंत्री ने की समीक्षा

तेजस मार्क-1ए एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में देरी, इसी महीने रिव्यू मीटिंग प्रस्तावित; रक्षा मंत्री ने की समीक्षा

नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। भारतीय वायुसेना में फाइटर स्क्वॉड्रनों की कमी को पूरा करने के लिए एचएएल के साथ कुल 180 एलसीए तेजस मार्क-1ए विमानों का करार किया गया था, लेकिन अब तक एक भी विमान की डिलीवरी नहीं हो पाई है। एचएएल लगातार कई बार तय समय-सीमा चूक चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक, इसी महीने जून में रडार के प्रदर्शन और कुछ अन्य तकनीकी मुद्दों को दुरुस्त करने के बाद एचएएल भारतीय वायुसेना के समक्ष रिव्यू मीटिंग के लिए आ सकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी समय-समय पर एचएएल की परियोजनाओं की समीक्षा करते रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार को भी एचएएल के प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की गई। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में रक्षा सचिव, सीडीएस, भारतीय वायुसेना प्रमुख, सीएमडी एचएएल और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में लगातार हो रही देरी को लेकर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई बार सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके हैं। अब रक्षा मंत्रालय इस देरी के लिए एचएएल पर पेनल्टी लगाने की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। इसी प्रकार, इंजन की डिलीवरी में देरी को लेकर एचएएल भी अमेरिकी कंपनी जीई पर पेनल्टी लगाने की बात कह चुकी है।

रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि इस वर्ष तेजस मार्क-1ए की डिलीवरी शुरू हो सकती है। एचएएल के पास फिलहाल छह इंजन उपलब्ध हैं और करीब 18 विमानों के स्ट्रक्चर तैयार हैं। वर्ष के अंत तक लगभग 24 विमान तैयार होने की उम्मीद है। हालांकि, भारतीय वायुसेना को अब तक एक भी तेजस मार्क-1ए विमान नहीं मिला है।

तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम को लेकर इसी महीने एक रिव्यू मीटिंग प्रस्तावित है। इससे पहले यह बैठक मई में होनी थी, लेकिन उसे स्थगित कर दिया गया था। एचएएल के नए सीएमडी रवी कोटा ने वायुसेना प्रमुख से मुलाकात भी की थी।

वायुसेना पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह एचएएल को कुछ मामलों में तत्काल राहत देने पर विचार कर सकती है, लेकिन जिन तकनीकी मानकों को 'नॉन-नेगोशिएबल' माना गया है, उन पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यदि अनुबंध में निर्धारित मानकों के तहत कुछ ऐसी कमियां हैं, जिन्हें अस्थायी रूप से स्वीकार किया जा सकता है- मसलन कोई तकनीक पूरी तरह ऑटोमैटिक होने के बजाय फिलहाल मैनुअल तरीके से संचालित की जा सकती हो- तो वायुसेना उस पर विचार कर सकती है।

तेजस कार्यक्रम अब तक अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ा है, जिसकी मुख्य वजह इंजन की डिलीवरी में देरी भी रही है। हालांकि, अब धीरे-धीरे इंजन मिलने शुरू हो गए हैं। तेजस मार्क-1ए कार्यक्रम के लिए इंजन की डील अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) के साथ वर्ष 2021 में हुई थी। इस समझौते के तहत भारत को कुल 99 एफ404 इंजन मिलने हैं।

फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख पहले भी नाराजगी जता चुके हैं। तेजस के कई वेरिएंट हैं—तेजस मार्क-1, तेजस मार्क-1ए, तेजस ट्रेनर एयरक्राफ्ट और तेजस मार्क-2। इनमें तेजस मार्क-2 सबसे उन्नत संस्करण होगा, जिस पर फिलहाल काम जारी है।

मौजूदा सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से भारतीय वायुसेना को 42 फाइटर स्क्वॉड्रनों की आवश्यकता है, जबकि फिलहाल उसके पास केवल 29 स्क्वॉड्रन हैं। इस कमी को तेजस कार्यक्रम के माध्यम से पूरा किया जाना है। वायुसेना पहले ही 40 तेजस विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है।

एचएएल के साथ 83 एलसीए तेजस मार्क-1ए विमानों की डील हो चुकी है, लेकिन उनकी डिलीवरी अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इन 83 विमानों से चार फाइटर स्क्वॉड्रन तैयार होंगे। इसके अलावा, पांच अतिरिक्त स्क्वॉड्रनों के लिए 97 और तेजस मार्क-1ए विमानों की खरीद को भी मंजूरी मिल चुकी है।

तेजस के कुल 11 स्क्वॉड्रनों में से दो पहले ही वायुसेना में शामिल हो चुके हैं, जबकि नौ स्क्वॉड्रन अभी शामिल होने बाकी हैं।

--आईएएनएस

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