नई दिल्ली, 4 फरवरी (आईएएनएस)। आमड़ा या स्पोंडियास पिन्नाटा, जो विटामिन सी का खजाना है। आंवले के बाद यह सी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। खट्टा-मीठा फल स्वाद के साथ ही सेहतमंद रखने में भी मददगार है। यह पाचन सुधारता है, इम्युनिटी बढ़ाता है, त्वचा निखारता है और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है।
भारतीय घरों में आमड़ा की चटनी और अचार के साथ ही सब्जी के रूप में भी इसका इस्तेमाल होता आया है।
बिहार सरकार का वन एवं पर्यावरण विभाग आमड़ा को प्रकृति का अनमोल उपहार बताते हुए इसकी उपयोगिता और महत्व पर विस्तार से जानकारी साझा करती है। आमड़ा एक मध्यम आकार का धीमी गति से बढ़ने वाला वृक्ष है, जो मुख्य रूप से भारत के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में पाया जाता है। बिहार में यह स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय है, और ग्रामीण इलाकों में घर-घर में इसकी खेती या प्राकृतिक रूप से उगने वाले पेड़ देखे जा सकते हैं।
आमड़ा के फल छोटे, गोल, हरे-पीले रंग के और खट्टे-मीठे होते हैं। ये फल आंवले के बाद विटामिन सी का सबसे अच्छा स्रोत माने जाते हैं। इनमें विटामिन सी के अलावा आयरन, कैल्शियम, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स और कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। फल खट्टे होने के कारण इन्हें कच्चा खाने से लेकर चटनी, अचार, सब्जी और चटपटी चीजें बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय घरों में आमड़ा की चटनी और अचार घरों में बहुत पसंद किए जाते हैं।
आयुर्वेद में आमड़ा का काफी महत्व है। इसके फल, पत्तियां, छाल और बीज का इस्तेमाल अलग-अलग बीमारियों में किया जाता है। आमड़ा पाचन तंत्र को मजबूत करता है, कब्ज दूर करता है, भूख बढ़ाता है, त्वचा रोगों में फायदेमंद होता है और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
आमड़ा में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
खास बात है कि आमड़ा का मौसम मुख्य रूप से गर्मियों में आता है। हालांकि, इसके आचार का सेवन साल भर किया जा सकता है।
--आईएएनएस
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