नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। मौजूदा समय में किसी विकेटकीपर के लिए विकेटकीपिंग के साथ बल्लेबाजी में दक्ष होना जरूरी है। बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के आधार पर ही उसे भारतीय टीम में या फिर आईपीएल में मौका मिलता है। एमएस धोनी के आने के बाद विकेटकीपर के लिए बेहतर बल्लेबाज होना आवश्यक हो गया है।
एक दौर था जब विकेटकीपिंग के दम पर कई खिलाड़ी भारत के लिए खेले। विजय यादव का नाम इसमें प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी विकेटकीपिंग के दम पर उन्होंने हरियाणा को रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाया था।
विजय यादव का जन्म 14 मार्च 1967 को गोंडा, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह हरियाणा की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेला करते थे। हरियाणा के लिए उन्होंने 1987-88 सत्र में डेब्यू किया था। 1990-91 में हरियाणा ने मुंबई को हराकर रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता था। उस सीजन एक विकेटकीपर के तौर पर उनका प्रदर्शन शानदार रहा था। उन्होंने 24 कैच पकड़े और 6 बल्लेबाजों को स्टंप किया था। उसके अगले सीजन विकेट के पीछे उन्होंने 25 शिकार किए। इसका इनाम उन्हें मिला और 1992-93 में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर मौका मिला।
विकेटकीपिंग के अलावा निचले क्रम में आक्रामक बल्लेबाजी करने वाले विजय का अंतरराष्ट्रीय करियर संक्षिप्त (1992-94) रहा। दो साल के करियर में उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 1 टेस्ट और 19 वनडे खेले। टेस्ट की 1 पारी में 30 रन बनाने वाले विजय ने वनडे की 12 पारियों में 2 बार नाबाद रहते हुए 118 रन बनाए थे। उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 34 रन है। विजय ने टेस्ट में 1 कैच पकड़ा है और 1 स्टंप किया है। वहीं वनडे में 12 कैच और 7 स्टंपिंग उनके नाम हैं।
विजय यादव ने दिसंबर 1992 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था, वहीं मार्च 1993 में अपना एकमात्र टेस्ट खेला था। अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच उन्होंने 5 नवंबर 1994 को खेला था।
उनका घरेलू करियर लंबा रहा था। 1987-88 से 1998-99 के बीच उन्होंने हरियाणा के लिए 89 प्रथम श्रेणी और 67 लिस्ट ए मैच खेले। प्रथम श्रेणी में 7 शतक और 23 अर्धशतक की मदद से 3,988 रन और लिस्ट ए में 1 अर्धशतक की मदद से 748 रन बनाए हैं। प्रथम श्रेणी में उनके नाम 237 कैच और 46 स्टंपिंग, और लिस्ट ए में 52 कैच और 33 स्टंपिंग हैं। 1999 के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया था।
2006 में वह एक कार दुर्घटना का शिकार हुए थे। इसमें उनके 11 साल के बेटे की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद विजय यादव अक्सर अस्वस्थ रहते हैं।
--आईएएनएस
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