नालंदा के ऐतिहासिक राजगीर में भीषण ठंड के मौसम में पहली बार गर्म जलधाराओं के सूखने से गंभीर संकट पैदा हो गया है। गंगा-जमुना और व्यास कुंड के सूख जाने से पंडा समाज, स्थानीय लोग और श्रद्धालु चिंतित हैं। आमतौर पर गर्मियों में सूखने वाले ये कुंड इस बार जनवरी में ही सूख गए, जो राजगीर के इतिहास में अभूतपूर्व है। 22 कुंड और 52 धाराओं से पहचाने जाने वाले इस तीर्थ क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान खतरे में है। सबसे बड़ी चिंता 17 मई से शुरू होने वाले विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले को लेकर है, जब करोड़ों श्रद्धालु शाही स्नान के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञ और पंडा समिति इस संकट के लिए अंधाधुंध कमर्शियल बोरिंग, गिरते जलस्तर और पुराने संरक्षण नियमों की अनदेखी को जिम्मेदार मान रहे हैं।
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