नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के साथ हुई अपनी बातचीत के बारे में बताया है। गंभीर ने कहा कि उन्होंने 15 वर्षीय खिलाड़ी को समझाया कि अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद, कभी-कभी खिलाड़ी को अपने मौके का इंतजार करना पड़ता है।
इस साल जुलाई में सूर्यवंशी इंग्लैंड के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बने। उन्होंने 15 साल और 99 दिन की उम्र में अपना टी20 इंटरनेशनल डेब्यू किया और सचिन तेंदुलकर का लंबे समय से चला आ रहा रिकॉर्ड तोड़ा। इसके बाद, वह पुरुषों के इंटरनेशनल क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ 15 साल और 118 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की।
हालांकि, उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज और एशियन गेम्स से पहले जापान के खिलाफ खेले गए एकमात्र टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में खेलने का मौका नहीं मिला। 15 साल के इस बल्लेबाज ने श्रीलंका के खिलाफ एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में भारत की प्लेइंग इलेवन में वापसी की, जहां उन्होंने 21 गेंदों पर 38 रन बनाकर मैच में अहम भूमिका निभाई।
गंभीर ने 'जियोस्टार' पर कहा, "यह मेरे लिए भी एक नया अनुभव था। हां, वह अच्छी फॉर्म में थे, लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि कभी-कभी, उन खिलाड़ियों की वजह से जिन्होंने लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन किया है, उन्हें अपने मौके का इंतजार करना पड़ सकता है। एक और बात, सोशल मीडिया या बाहर की बातें प्लेइंग इलेवन तय नहीं करतीं।"
भारतीय मुख्य कोच ने आगे कहा, "यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि ड्रेसिंग रूम का समीकरण कैसा है, कौन सा खिलाड़ी कोच और कप्तान को मैच जिताने की क्षमता रखता है, तथा टीम की सबसे मजबूत 'प्लेइंग इलेवन' क्या है। इसके साथ ही यह भी देखना होता है कि किसने लंबे समय तक लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। अगर आज हम वैभव को मौका देते हैं, तो मेरे और टीम से बाहर होने वाले खिलाड़ी- चाहे वह अभिषेक हों या संजू सैमसन के बीच बातचीत काफी मुश्किल होगी।"
उन्होंने आगे कहा, "यही वजह है कि हम अचानक उस टीम संयोजन (कॉम्बिनेशन) को नजरअंदाज नहीं कर सकते, जिसने पिछले डेढ़-दो साल में शानदार प्रदर्शन किया है। लगातार तीन-चार मैचों में असफल होने पर हम अनुभवी खिलाड़ियों को ड्रॉप करके किसी ऐसे युवा को टीम में शामिल नहीं कर सकते, जो भले ही बेहद प्रतिभाशाली और बेहतरीन फॉर्म में हो। खिलाड़ियों को कभी-कभी अपने मौके का इंतजार करना ही पड़ता है, क्योंकि हमारा मुख्य उद्देश्य ड्रेसिंग रूम में सुरक्षा और निरंतरता का माहौल बनाए रखना है।"
एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में वैभव 9 गेंदों में 15 रन बनाकर आउट हुए थे। हालांकि, भारतीय टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को हराकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया। 15 साल, छह महीने और 6 दिन की उम्र में वैभव एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले सबसे युवा भारतीय बने। उन्होंने शूटर सौरभ चौधरी का रिकॉर्ड तोड़ा, जो जकार्ता में हुए एशियन गेम्स 2018 में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीतने के समय 16 साल, तीन महीने और 9 दिन के थे।
--आईएएनएस
एसएम/एएस