उत्तर प्रदेश का अद्भुत कुंड, जहां धर्म को मिली जीत, भक्त प्रह्लाद की भक्ति में भस्म हुई थी होलिका

Prahlad kund hardoi

हरदोई, 27 फरवरी (आईएएनएस)। रंगों का त्योहार होली इस बार 4 मार्च को है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन का विशेष महत्व है। यह दिन नकारात्मकता, दुख, रोग और कष्टों के अंत का प्रतीक है। साथ ही यह अधर्म पर धर्म की विजय और भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का भी जीता-जागता प्रमाण है। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्थित प्रह्लाद कुंड इसी ऐतिहासिक और पौराणिक घटना का साक्षी है।

पुराणों के अनुसार, असुरराज हिरण्यकश्यप को भगवान विष्णु से वैर था। वह स्वयं को भगवान मानता था और किसी को भी विष्णु की भक्ति नहीं करने देता था। उसके पुत्र प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे। प्रह्लाद की भक्ति देखकर हिरण्यकश्यप क्रोधित हो गया। उसने प्रह्लाद को कई बार मारने की कोशिश की, लेकिन हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित रहे। आखिरी प्रयास में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका का सहारा लिया।

होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। हिरण्यकश्यप ने होलिका को प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर आग लगाने को कहा, ताकि प्रह्लाद जल जाए। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका की गोद में बैठे प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका स्वयं भस्म हो गई। इस घटना के बाद लोग खुशी से रंग लगाकर और फूल बरसाकर इस विजय का जश्न मनाने लगे। यही परंपरा आज होली के रूप में मनाई जाती है।

उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार, हरदोई में स्थित प्रह्लाद कुंड पावन स्थली है जहां यह चमत्कार हुआ था। यहां का कुंड आज भी भक्ति और ईश्वरीय शक्ति की याद दिलाता है। कुंड के पास छोटा-सा मंदिर है, जहां प्रह्लाद और भगवान नरसिंह की पूजा होती है। होलिका दहन के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वे होलिका दहन करते हैं और प्रह्लाद की भक्ति से प्रेरणा लेते हैं।

यह कुंड न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह लोगों को सिखाता भी है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। मान्यता है कि श्रद्धालु अगर प्रह्लाद कुंड के दर्शन करें तो वे उस अलौकिक शक्ति को महसूस कर सकते हैं और उनकी सभी समस्याओं का नाश होता है।

प्रह्लाद कुंड हरदोई शहर से कुछ दूरी पर स्थित है और आसानी से पहुंचा जा सकता है।

--आईएएनएस

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