उपराष्ट्रपति के श्रीलंका दौरे का संदेश साफ, भारत अपने पड़ोसियों संग मजबूती से खड़ा: उच्चायुक्त संतोष झा (आईएएनएस इंटरव्यू)

Indian HC Santosh Jha on Vice President's Srilanka visit

कोलंबो, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन दो दिवसीय दौरे पर 19 अप्रैल को श्रीलंका की यात्रा पर रहेंगे। इसे भारत-श्रीलंका संबंधों में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। करीब 26 वर्षों बाद किसी भारतीय उपराष्ट्रपति की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है। श्रीलंका में भारतीय हाई कमिश्नर (उच्चायुक्त) संतोष झा ने आईएएनएस से बातचीत में यात्रा की अहमियत समझाई।

आईएएनएस: 26 साल का अंतराल और उसके बाद देश के उपराष्ट्रपति का दौरा, इसे श्रीलंका-भारत रिश्तों के लिहाज से कैसे देखा जाना चाहिए?

उच्चायुक्त संतोष झा: यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार बढ़ा है। श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने हाल के वर्षों में भारत का दौरा किया, वहीं नरेंद्र मोदी भी अप्रैल 2025 में कोलंबो गए थे। श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने की भारत यात्रा ने भी इस संवाद को और मजबूत किया। इस तरह के उच्चस्तरीय दौरे द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा का अवसर देते हैं। इससे न केवल चल रही परियोजनाओं को गति मिलती है, बल्कि अटकी हुई पहलों को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक मार्गदर्शन भी मिलता है। दौरे के अंत में कई ठोस परिणाम सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

आईएएनएस: यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को कैसे परिभाषित करता है?

उच्चायुक्त संतोष झा: भारत और श्रीलंका के रिश्तों की सबसे बड़ी खासियत दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ता भरोसा और आत्मीयता है। व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में प्रगति के साथ-साथ आम लोगों का जुड़ाव इन संबंधों को नई ऊंचाई दे रहा है। हम लोगों के व्यावसायिक रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं। दोनों अच्छे मित्र और एक दूसरे पर भरोसा करने वाले देश हैं। महज ट्रेड डील की वजह से ये नहीं हो रहा है बल्कि दोनों देशों के लोगों में सद्भाव और एक खास तरह का जुड़ाव है।

आईएएनएस: भारत ने बाढ़ के बाद आपदा से उबरने में श्रीलंका की मदद की। क्या कोई नया एग्रीमेंट या पार्टनरशिप अनाउंस होने की उम्मीद है?

उच्चायुक्त संतोष झा: अगर आप पिछले 20-25 सालों को देखें तो यह लगातार रिकॉर्ड रहा है, हर बार जब श्रीलंका को कोई मुश्किल हुई है तो भारत सबसे पहले मदद करने वाला रहा है। जब साइक्लोन दितवाह आया जो सच में सबसे ज्यादा नुकसानदायक था। तो भारत ने सबसे पहले मदद की, ठीक उसी दिन जब लैंडफॉल हुआ था।

तो यह कई मायनों में एक नया भारत है जो अपने पड़ोसियों की मदद और सहायता के लिए तत्पर रहता है जैसा कि एक पड़ोसी और एक मित्र देश के तौर पर उसे करना चाहिए। हम बचाव और राहत का सामान भेज पाए। हमने तुरंत मदद दी और फिर पुनर्निर्माण के बाद मदद के लिए 400 और 50 मिलियन यूएस डॉलर के पैकेज से भी मदद की, अब हम इसे लागू करने की प्रक्रिया में हैं, यह हमारे काम की एक दिशा है।

2022 के आर्थिक संकट के दौरान भारत द्वारा दी गई 4.1 अरब डॉलर की सहायता ने श्रीलंका के लिए बड़ी राहत साबित होकर इस भरोसे को और मजबूत किया।

आईएएनएस: इस यात्रा के दौरान किन मुख्य क्षेत्रों में मजबूती आने की उम्मीद है?

उच्चायुक्त संतोष झा: सहयोग के तहत कई अहम परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इनमें बिजली ग्रिड कनेक्टिविटी, सौर ऊर्जा पहल और त्रिंकोमाली को ऊर्जा हब के रूप में विकसित करने की योजना शामिल है। इसके अलावा, भारत के आधार मॉडल पर आधारित डिजिटल पहचान परियोजना भी श्रीलंका में लागू की जा रही है, जिससे हर नागरिक को यूनिक आईडी प्रदान की जाएगी।

आईएएनएस: यह दौरा भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” पॉलिसी में कैसे फिट बैठता है?

उच्चायुक्त संतोष झा: रणनीतिक दृष्टि से हिंद महासागर क्षेत्र में स्थित श्रीलंका भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। “नेबरहुड फर्स्ट” और 'महासागर' दोनों को हम महत्व देते हैं। इसके तहत दोनों देश समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग को मजबूत कर रहे हैं। बिम्सटेक और कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव जैसे मंच इस सहयोग को और विस्तार दे रहे हैं। हम ब्लू इकॉनमी पर भी गंभीरता से बात करते हैं।

आईएएनएस: क्या कल्चरल और एजुकेशनल एक्सचेंज को मजबूत करने के लिए कोई घोषणा होगी?

उच्चायुक्त संतोष झा: सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध भारत-श्रीलंका रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी बने हुए हैं। बौद्ध धर्म की साझा विरासत के कारण दोनों देशों के बीच तीर्थ और पर्यटन का आदान-प्रदान लगातार बढ़ रहा है। भारतीय पर्यटक श्रीलंका के रामायण सर्किट की ओर आकर्षित होते हैं, जहां सीता अम्मन मंदिर जैसे स्थान प्रमुख हैं। उपराष्ट्रपति भी सीता मंदिर जाएंगे, जो राम के इतिहास के सबसे जरूरी स्थलों में से एक है। वहीं भारत में बुद्धा सर्किट है जहां श्रीलंका से लोग पहुंचते हैं। पारस्परिक संबंधों को ये बहुत मजबूत कड़ियां हैं। हमारा इतिहास ही दोनों के बीच अटूट संबंध की वजह है। जैसा श्रीलंका के राष्ट्रपति कहते हैं ये (भारत-श्रीलंका) एक परिवार है और यही विशिष्ट है।

प्रधानमंत्री जब आए थे तो कहा था भले ही आप अप्पम कहें जिसे आप यहां हॉपर कहते हैं तो उन्होंने इस एक बात से ही जता दिया कि रिश्ते कितने गहरे जुड़े हुए हैं।

मैं आपको बस इतना बता सकता हूं कि हम इन सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं, इसे प्रमोट कर रहे हैं, इसे आगे बढ़ा रहे हैं, आप जानते हैं, हर समय इसका प्रचार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, हमारे पास एक प्रोजेक्ट है जिसे हमने लागू किया है जहां हम बौद्ध पूजा स्थलों को मुफ्त बिजली देते हैं। उस प्रोजेक्ट का दूसरा हिस्सा भी लागू हो रहा है। पहले में ही 5 हजार मंदिरों को शामिल किया गया। हमने पाली को क्लासिकल भाषा घोषित किया है। हमारे संबंध बहुत गहरे हैं।

आईएएनएस: दोनों देश टूरिज्म को और कैसे बढ़ा सकते हैं?

उच्चायुक्त संतोष झा: टूरिज्म भी बहुत शानदार है। श्रीलंका में पहले से ही भारत से सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं। पिछले साल यह लगभग 25 फीसदी था और भारत में पिछले 15 या 20 सालों से यही ट्रेंड रहा है। बिजनेस यात्रा

तो यह एक ऐसा एरिया है जिस पर लगातार काम हो रहा है। हम सोशल मीडिया के जरिए इसे प्रमोट करते रहते हैं। हम प्रमोशन के लिए इवेंट्स करते हैं। हम उन एरिया में भी इन्वेस्ट करने की कोशिश कर रहे हैं जो टूरिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं।उदाहरण के लिए, हमने ट्राइकॉमली में त्रिवरम मंदिर के लिए ग्रांट असिस्टेंस की घोषणा की है, जो एक और रामायण साइट है। अनुराधापुरा भी हम लोग पर्यटक क्षेत्र के तौर पर डेवलप करेंगे।

आईएएनएस: उपराष्ट्रपति के दौरे के बीच दूसरे पड़ोसी देशों के लिए, खासकर मौजूदा हालात को देखते हुए क्या संदेश देना चाहेंगे?

उच्चायुक्त संतोष झा: यह साफ संदेश है कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ मजबूती से खड़ा है। मुश्किल वैश्विक हालात के बीच, यह साझेदारी भरोसे, सहयोग और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है। सबके लिए मुश्किल समय है। पश्चिम एशिया संकट की वजह से श्रीलंका भी परेशान हैं। ऐसे में ऊर्जा सहयोग बेहद अहम है। हाल ही में भारत ने श्रीलंका को 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति की। हम ऐसा करते रहेंगे, इस महीने अप्रैल में भी ऐसा कुछ जारी रहेगा। ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत ने ईंधन संकट के दौरान श्रीलंका को पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति कर मदद की थी और भविष्य में भी ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में साझेदारी जारी रखने का भरोसा दिया है। जैसे हम सोलर प्रोजेक्ट, ग्रिड कनेक्टिविटी और त्रिंकोमाली को ऊर्जा हब बनाने जैसी पहलें श्रीलंका की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेंगी। हम इन मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।

--आईएएनएस

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