नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)। भारतीय कुश्ती को इंटरनेशनल स्टेज पर पहचान दिलाने में पहलवान सुशील कुमार का रोल काफी अहम रहा। सुशील ओलंपिक के मैट पर भारत के लिए इस खेल में दो मेडल जीतने वाले इकलौते पहलवान हैं। सुशील अपने चचेरे भाई को देखकर कुश्ती खेलने के लिए प्रेरित हुए थे और उन्होंने 14 साल की उम्र में पहली बार अखाड़े में कदम रखा था। हालांकि, विवादों ने उनके करियर पर ग्रहण लगा दिया और उन्हें जेल तक जाना पड़ा।
सुशील का जन्म 26 मई, 1983 को नजफगढ़ के पास स्थित बापरोला गांव में हुआ। सुशील के पिता एक बस ड्राइवर थे और आर्थिक तंगी परिवार के लिए बड़ी समस्या थी। हालांकि, पिता ने पैसों की कमी को सुशील के करियर के आड़े कभी नहीं आने दिया। सुशील के चचेरे भाई संदीप पहलवान थे और उनसे ही सुशील इस खेल में आने के लिए प्रेरित हुए। सुशील ने अपनी शुरुआती ट्रेनिंग दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में ली, जहां उन्होंने यशवीर सिंह और रामफल की कोचिंग में कुश्ती की बारीकियां सीखीं। इसके बाद सुशील ने दिग्गज पहलवान माने जाने वाले महाबली सतपाल से कुश्ती के दांव-पेंच सीखे और इस खेल में रम गए।
सुशील बेहद कम उम्र में ही जबरदस्त दांव लगातार पहलवानों को धूल चटाने में माहिर होते चले गए। उन्होंने 1998 में विश्व कैडेट खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वहीं, एशियाई जूनियर कुश्ती चैंपियनशिप में भी अपने खेल से हर किसी को प्रभावित करते हुए गोल्ड जीता। इसके बाद सुशील ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह इस खेल में जल्द ही बड़ा चेहरा बन गए।
भारतीय पहलवान के लिए साल 2008 यादगार साबित हुआ। साल 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक में सुशील ने इस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व किया और ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्होंने देश को 1952 के बाद इस खेल में ओलंपिक में पहला पदक दिलाया। वह साल 2010 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले पहलवान बने। भारत में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सुशील का जलवा देखने को मिला और उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
साल 2012 में इंग्लैंड की धरती पर हुए ओलंपिक में सुशील ने अपने करियर के सबसे बेहतरीन दांव लगाए और सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। वह भारत के लिए कुश्ती में दो ओलंपिक पदक जीतने वाले पहले पहलवान बने। ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सुशील ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया, तो 2018 में गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भी वह गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे। कुश्ती के खेल में शानदार उपलब्धि के लिए सुशील को साल 2005 में अर्जुन पुरस्कार, 2008 में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और 2011 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
--आईएएनएस
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