शंकर अंतरराष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय: दिल्ली का एक ऐसा घर, जहां दिखती है कई देशों की संस्कृति

शंकर अंतरराष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय: एक ऐसा घर, जहां दिखाई देती है हर संस्कृति की परंपरा

नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। यह कहानी है राजधानी दिल्ली के एक कोने में बने ऐसे अनोखे घर की, जहां वेशभूषाओं की चकाचौंध भरी एक श्रृंखला है, जिसमें हर एक अलग संस्कृति की परंपराओं की एक छोटी-सी झलक दिखाई पड़ती है। यह अनोखा घर 'गुड़ियों' का है, जिसे गुड़ियों का संग्रहालय कहते हैं। रंग-बिरंगे और भांति-भांति के कपड़ों से सजी हुईं करीब 85 देशों से संग्रहित गुड़िया यहां एक साथ देखने को मिल जाती है।

30 नवंबर 1965 को स्थापित 'शंकर अंतरराष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय' मशहूर कार्टूनिस्‍ट 'के. शंकर पिल्‍लई' की देन है। हालांकि, इस गुड़िया संग्रहालय को बनाने के पीछे की घटना बड़ी ही दिलचस्प है। प्रसिद्ध कार्टूनिस्‍ट 'के. शंकर पिल्‍लई' पत्रकारों के उस दल के सदस्य हुआ करते थे, जिन्हें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ विदेश दौरों पर जाने का मौका मिला करता था। वे ज्यादातर विदेश यात्राओं में नेहरू के साथ रहे।

इसी विदेश भ्रमण के बीच उनका लगाव गुड़ियों से बढ़ने लगा। पहले जब सिनेमाई दुनिया बहुत सीमित थी, उस समय गुड़िया खेल और मनोरंजन का जरिया हुआ करती थी। उस दौर में शंकर पिल्लई ने दुनियाभर की यात्रा की और पोशाक वाली गुड़ियों का खजाना इकट्ठा कर लिया। उनके पास लगभग 500 तरह की गुड़ियां इकट्ठी हो गई थीं। वे चाहते थे कि देश भर के बच्चे इन गुड़ियों को देखें।

एक बार की बात है जब जवाहरलाल नेहरू के साथ इंदिरा गांधी प्रदर्शनी देखने गईं। गुड़ियों को देखकर वे लोग बहुत खुश हुए। उसी समय इंदिरा गांधी ने गुड़ियों के लिए एक स्थाई घर बनाने का सुझाव दिया। इसके बाद बाल पुस्तक भवन के एक हिस्से में गुड़ियों को भी घर मिल गया।

अंतरराष्ट्रीय गुड़िया संग्रहालय में गुड़ियों के कलेक्शन को दो हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्से में यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स जैसे पश्चिमी देशों से इकट्ठा की गई गुड़ियां हैं, जबकि दूसरे हिस्से में दूसरे एशियाई देशों, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और भारत से इकट्ठा की गई गुड़ियां हैं।

गुड़िया संग्रहालय का मुख्य कलेक्शन म्यूजियम की वर्कशॉप में बनाई गई 150 तरह की भारतीय कॉस्ट्यूम वाली गुड़ियों का है। इस वर्कशॉप के कारीगर गुड़ियों को बहुत अच्छे से बनाते हैं, जिससे उनके शरीर, कॉस्ट्यूम और गहनों का तालमेल बनता है। इस कलेक्शन में भारत के खास क्लासिकल डांस में से एक, कथकली के किरदार और उनके शानदार कॉस्ट्यूम शामिल हैं। दूसरी खास डॉल्स में जापान की बॉयज एंड गर्ल्स फेस्टिवल डॉल्स, क्वीन के कलेक्शन की रेप्लिका डॉल्स, हंगरी की मेपोल डांसर्स, जापान की काबुकी और समुराई डॉल्स, स्पेन की फ्लेमेंको डांसर्स, थाईलैंड का विमेंस ऑर्केस्ट्रा, और श्रीलंका की कैंडी पेहारा शामिल हैं।

इस तरह केशव शंकर पिल्लई की ओर से स्थापित यह संग्रहालय सीमाओं से परे है, जो बारीकी से तैयार की गई गुड़ियों के माध्यम से हमारे ग्रह की विविध संस्कृतियों और परंपराओं का जश्न मनाता है।

--आईएएनएस

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