सीमा से सटे गांव की बेटी हर्षिता वर्मा ने किया कमाल, सीबीएसई 10वीं में हासिल किए 99.8 प्रतिशत अंक

सीमा से सटे गांव की बेटी हर्षिता वर्मा ने किया कमाल, सीबीएसई 10वीं में हासिल किए 99.8 प्रतिशत अंक

कठुआ, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 500 मीटर से 1 किलोमीटर दूर स्थित हीरानगर सब-डिवीजन के गांव गुज्जर चक की 16 वर्षीय हर्षिता वर्मा ने सीबीएसई दसवीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणामों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। साईं इंटरनेशनल स्कूल, हीरानगर की छात्रा हर्षिता जम्मू-कश्मीर में टॉपर रही हैं, जबकि पूरे देश में उनका दूसरा स्थान है।

जीरो लाइन से सटे इस गांव में रहने वाली हर्षिता की सफलता ने पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी है। परिणाम घोषित होने के बाद हर्षिता की खुशी का ठिकाना नहीं है, लेकिन वह इसे मात्र अपनी यात्रा की शुरुआत मानती हैं।

हर्षिता ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया, "मैंने सीबीएसई में 99.8 प्रतिशत स्कोर किया है। मैं जम्मू-कश्मीर में टॉपर हूं और ऑल इंडिया में मेरी दूसरी रैंक है।" उन्होंने अपने स्कूल के शिक्षकों की खूब तारीफ की और कहा, "यहां के टीचर बहुत अच्छे हैं। उन्होंने मुझे बहुत अच्छे से गाइड किया। इसका पूरा श्रेय उन्हें जाता है।"

हर्षिता के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं। पिता ओमकार वर्मा बिलावर के हायर सेकेंडरी स्कूल दुनेरा में और माता कडियाला में तैनात हैं। हर्षिता ने बताया कि उन्होंने पूरे साल नियमित पढ़ाई पर ध्यान दिया। स्कूल से घर पहुंचने के बाद दो घंटे आराम लेकर वह लगातार छह घंटे पढ़ाई करती थीं। नोट्स बनाती थीं और डाउट होने पर ऑनलाइन समाधान ढूंढ लेती थीं। उन्होंने कभी ट्यूशन भी नहीं लिया।

उनका सपना डॉक्टर बनने का है। वह वर्तमान में जम्मू में 'नीट' की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मैं नीट की तैयारी शुरू कर चुकी हूं और डॉक्टर बनना चाहती हूं। डॉक्टर बनना एक नेक पेशा है। इसमें हम दूसरों की जान बचा सकते हैं। डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। मैं दूसरों की जान बचाना और उन्हें खुश रखना चाहती हूं।"

छात्रा के पिता ओमकार वर्मा ने अपनी बेटी की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे शब्दों में बयान नहीं कर सकता कि कितना गर्व महसूस हो रहा है। हर्षिता ने बहुत कड़ी मेहनत की है। हम तो बस उसे गाइड कर सकते थे, बाकी सब उसकी अपनी मेहनत है। स्कूल ने भी उसकी बहुत मदद की है।"

ओमकार वर्मा ने सीमा क्षेत्र की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बताया, "हमारा घर बॉर्डर से ठीक उस पार है। पहले बहुत दिक्कतें होती थीं। हर रोज गोलीबारी होती थी, कई बार हम कई दिनों तक फंस जाते थे। स्कूल बस नहीं आती थी, इसलिए पढ़ाई में बहुत रुकावट आती थी, लेकिन अब सीजफायर के बाद हालात में काफी सुधार आया है। शांति होने से बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।"

उन्होंने लड़कियों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा, "आजकल लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। खासकर हमारे इलाके में टॉप पर सबसे ज्यादा लड़कियां ही हैं। सीजफायर की वजह से सीमावर्ती इलाकों की बेटियां अब अच्छे से पढ़ाई कर पा रही हैं और आगे बढ़ रही हैं।"

--आईएएनएस

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