सही जानकारी की कमी और भ्रांतियों के कारण लोग नहीं कर पाते 'रक्तदान', जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

सही जानकारी की कमी और भ्रांतियों के कारण लोग नहीं कर पाते 'रक्तदान', जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

नई दिल्ली, 28 मई (आईएएनएस)। रक्तदान को महादान कहा जाता है क्योंकि एक व्यक्ति द्वारा दिया गया रक्त किसी जरूरतमंद की जान बचा सकता है। इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में लोग रक्तदान से बचते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह इससे जुड़ी गलतफहमियां और सही जानकारी की कमी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग रक्तदान से जुड़ी गलत धारणाओं को छोड़ दें, तो देश में रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। एक यूनिट रक्त कई लोगों की जिंदगी बचाने में मदद कर सकता है। इसलिए हर स्वस्थ व्यक्ति को समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।

ऐसे में नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) लोगों से अपील करते हुए कहता है कि वे भ्रांतियों को दूर कर स्वैच्छिक रक्तदान को अपनाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग यह मानते हैं कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर हो जाता है या लंबे समय तक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है। डॉक्टर्स का कहना है कि स्वस्थ व्यक्ति के लिए रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है। शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी को पूरा कर लेता है और नियमित स्वास्थ्य जांच के बाद ही रक्तदान कराया जाता है।

एनएचएम के मुताबिक, 18 से 65 वर्ष की आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। रक्तदान करने वाले व्यक्ति के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर सामान्य होना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को मौसमी संक्रमण, टीबी, कैंसर या कोई गंभीर बीमारी है, तो उसे रक्तदान नहीं करना चाहिए।

विशेषज्ञ बताते हैं कि रक्तदान से पहले डोनर की पूरी हेल्थ चेकअप की जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि रक्तदान करने वाला व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है या नहीं। रक्तदान की प्रक्रिया में केवल कुछ मिनट लगते हैं और इससे शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। पुरुष हर तीन महीने पर और महिलाएं चार महीने पर रक्तदान कर सकते हैं।

देश में हर साल बड़ी संख्या में मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ती है। दुर्घटनाओं, सर्जरी, प्रसव और गंभीर बीमारियों के दौरान मरीजों को समय पर रक्त मिलना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान समाज के लिए एक बड़ी मदद साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इस नेक काम से जुड़ सकें।

--आईएएनएस

एमटी/पीएम